भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर घर के पूजा मंदिर में

घर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति रखने के महत्वपूर्ण वास्तु नियम

By Deepak Kumar
Published: सोमवार, 31 अगस्त 2026 at 9:59 PM

जब भी हमारे घर की सुख-शांति, समृद्धि और आर्थिक स्थिरता की बात आती है, तो सबसे पहले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण किया जाता है। सनातन धर्म में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में श्रद्धा, स्वच्छता और अच्छे कर्मों के साथ लक्ष्मी-नारायण की पूजा की जाती है, वहां सकारात्मक और शांत वातावरण बना रहता है।

लेकिन अक्सर लोग जाने-अनजाने घर में विष्णु-लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करते समय कुछ ऐसी वास्तु और धार्मिक बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिनका ध्यान रखना उचित माना जाता है। यदि आप भी अपने घर में सुख-शांति और समृद्धि का सकारात्मक वातावरण बनाए रखना चाहते हैं, तो यह विस्तृत गाइड आपके लिए उपयोगी हो सकती है। आइए जानते हैं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति रखने से जुड़े 8 महत्वपूर्ण नियम।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की सही तस्वीर का चयन

घर में ऐसी तस्वीर या मूर्ति रखना शुभ माना जाता है जिसमें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्वरूप शांत, प्रसन्न और सौम्य दिखाई दे। कई धार्मिक परंपराओं में लक्ष्मी-नारायण के संयुक्त स्वरूप को विशेष महत्व दिया जाता है।

तस्वीर में भगवान विष्णु शेषनाग पर विराजमान हों या गरुड़ जी के साथ हों और माता लक्ष्मी उनके साथ दिखाई दें, ऐसे स्वरूप को श्रद्धा से घर के पूजा स्थान में रखा जा सकता है। तस्वीर या मूर्ति का चयन करते समय मुख्य रूप से यह ध्यान रखें कि स्वरूप शांत और गरिमापूर्ण हो।

ऐसी दिव्य तस्वीर घर के पूजा स्थान में श्रद्धा और सकारात्मक वातावरण का प्रतीक मानी जाती है तथा परिवार में आध्यात्मिक भावनाओं को बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

पूजा घर या मंदिर में मूर्ति और तस्वीर की सही दिशा

vishnu lakshmi puja ghar sahi disha
Image Credit: Gemini

वास्तु शास्त्र और धार्मिक परंपराओं में पूजा स्थान की दिशा को महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति को घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व (North-East) दिशा में स्थापित करना कई वास्तु परंपराओं में शुभ माना जाता है।

यदि उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा स्थान बनाना संभव न हो, तो घर की परिस्थिति के अनुसार उत्तर दिशा को भी विकल्प के रूप में देखा जा सकता है। उत्तर दिशा का संबंध वास्तु परंपरा में धन और समृद्धि से जोड़ा जाता है।

हालांकि, हर घर की बनावट अलग होती है, इसलिए केवल दिशा के आधार पर चिंता करने के बजाय पूजा स्थान को साफ, शांत और व्यवस्थित रखना भी महत्वपूर्ण है।

मूर्ति या तस्वीर रखते समय मुद्रा और आकार का ध्यान

घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति रखते समय उनके स्वरूप और आकार का ध्यान रखना चाहिए। कई धार्मिक परंपराओं में बैठी हुई माता लक्ष्मी के स्वरूप को स्थिर समृद्धि और गृहस्थ सुख का प्रतीक माना जाता है।

इसलिए यदि आप लक्ष्मी-नारायण की नई तस्वीर या मूर्ति खरीद रहे हैं, तो शांत और प्रसन्न मुद्रा वाले संयुक्त स्वरूप को प्राथमिकता दे सकते हैं। माता लक्ष्मी की खड़ी या अन्य मुद्राओं वाली तस्वीरों को अपने आप में अशुभ मानना उचित नहीं है, क्योंकि अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में इनके अलग-अलग अर्थ मिलते हैं।

घर के मंदिर के लिए मूर्ति का आकार भी स्थान के अनुसार संतुलित होना चाहिए। बहुत बड़ी प्रतिमा रखने के बजाय ऐसी प्रतिमा चुनें जिसे आसानी से स्वच्छ रखा जा सके और जिसकी नियमित पूजा की जा सके।

गुरुवार और शुक्रवार को विशेष पूजा के नियम

भगवान विष्णु की पूजा के लिए गुरुवार और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए शुक्रवार को कई भक्त विशेष महत्व देते हैं। गुरुवार के दिन श्रद्धानुसार भगवान विष्णु को पीले पुष्प, पीले वस्त्र या पीली मिठाई अर्पित की जा सकती है। केले के पौधे के पास दीपक जलाने की परंपरा भी कुछ धार्मिक मान्यताओं में मिलती है।

वहीं शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी को कमल का पुष्प, खीर या अन्य सात्विक भोग अर्पित किया जा सकता है। श्रद्धानुसार श्री सूक्त का पाठ भी किया जाता है।

यदि आपकी पारिवारिक या धार्मिक परंपरा में उचित माना जाता है, तो इन दिनों भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पंचामृत से अभिषेक भी किया जा सकता है। इन उपायों को अनिवार्य नियम के रूप में नहीं, बल्कि श्रद्धा और परंपरा के अनुसार करना बेहतर है।

घर के किन स्थानों पर तस्वीर रखने से बचें और मंदिर के आसपास की शुद्धता

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति को मुख्य रूप से पूजा कक्ष या घर के मंदिर में रखना उचित माना जाता है। इन्हें केवल सजावट के लिए किसी भी स्थान पर लगाने के बजाय सम्मानपूर्वक पूजा स्थान में रखना बेहतर होता है।

बेडरूम, सीढ़ियों के नीचे, बाथरूम के ठीक सामने या ऐसे स्थान जहां नियमित रूप से गंदगी और अव्यवस्था रहती हो, वहां पूजा की तस्वीर या मूर्ति रखने से बचना चाहिए।

मंदिर के आसपास अनावश्यक कबाड़, कूड़ा या भारी सामान जमा न करें। जूते-चप्पलों को भी पूजा स्थान से उचित दूरी पर रखें। पूजा स्थान की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और इससे घर का वातावरण भी व्यवस्थित रहता है।

तस्वीर या मूर्ति की साफ-सफाई और खंडित होने पर नियम

घर में रखी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति की नियमित सफाई का ध्यान रखना चाहिए। पूजा स्थान पर धूल, गंदगी या अनावश्यक सामान जमा न होने दें।

यदि आपने फ्रेम वाली तस्वीर लगाई है, तो उसे समय-समय पर साफ करें। यदि मूर्ति स्थापित की है, तो अपनी पारिवारिक परंपरा और सुविधा के अनुसार उसकी नियमित पूजा एवं सफाई करें।

यदि कोई मूर्ति खंडित हो जाए या तस्वीर बहुत अधिक फट जाए, तो उसे नियमित पूजा में रखने के बजाय सम्मानपूर्वक अलग कर देना चाहिए। ऐसी स्थिति में उसे कहां और किस प्रकार विसर्जित या निस्तारित करना है, इसके लिए स्थानीय धार्मिक परंपरा या मंदिर के पुरोहित की सलाह लेना उचित रहेगा।

नियमित पूजा-अर्चना, भोग और मंत्र जाप की परंपरा

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करने के साथ नियमित श्रद्धापूर्वक पूजा करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सुबह या संध्या के समय दीपक जलाकर धूप दिखाई जा सकती है।

भोग में पीली मिठाई, खीर, मिश्री या अपनी परंपरा के अनुसार सात्विक प्रसाद अर्पित किया जा सकता है।

भगवान विष्णु की आराधना में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जाता है। माता लक्ष्मी की पूजा में श्री सूक्त या लक्ष्मी से जुड़े मंत्रों का पाठ भी श्रद्धानुसार किया जा सकता है।

नियमित पूजा का उद्देश्य केवल धन प्राप्ति नहीं, बल्कि मन में श्रद्धा, अनुशासन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक शांति विकसित करना भी है।

वास्तु उपायों के साथ अच्छे कर्मों का महत्व

घर में सुख-समृद्धि के लिए लोग अलग-अलग वास्तु उपाय अपनाते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ परंपराओं में पूजा स्थान पर दक्षिणावर्ती शंख रखना या तिजोरी को उत्तर दिशा की ओर रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ऐसे उपायों को धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के रूप में ही समझना चाहिए।

इन सभी उपायों से भी अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति के कर्म, व्यवहार और जीवनशैली हैं। जिस घर में परिवार के सदस्य एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, बुजुर्गों का आदर करते हैं, ईमानदारी से मेहनत करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं, वहां सकारात्मक वातावरण बनने की संभावना अधिक रहती है।

इसलिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ अपने व्यवहार और कर्मों को भी शुद्ध रखने का प्रयास करें। श्रद्धा, स्वच्छता, मेहनत और अच्छे कर्मों के साथ आगे बढ़ना ही जीवन में वास्तविक सुख और संतुलन का आधार बन सकता है।

निष्कर्ष

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति को घर में रखना केवल वास्तु का विषय नहीं, बल्कि श्रद्धा और धार्मिक भावना से भी जुड़ा हुआ है। पूजा स्थान की सही दिशा के साथ उसकी स्वच्छता, नियमित पूजा और घर के सकारात्मक वातावरण पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

वास्तु और धार्मिक मान्यताओं को अपनाते समय उन्हें डर या अंधविश्वास के रूप में लेने के बजाय अपनी आस्था, पारिवारिक परंपरा और परिस्थितियों के अनुसार समझदारी से अपनाना चाहिए। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के साथ यदि हम ईमानदारी, प्रेम, सम्मान और अच्छे कर्मों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, तो यही घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनाए रखने का सबसे सुंदर मार्ग है।

इस आर्टिकल को शेयर करें