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भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की गुरुवार पूजा

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को ऐसे करें प्रसन्न, कभी नहीं होगी धन की कमी

By Deepak Kumar
Published: सोमवार, 7 सितंबर 2026 at 11:47 PM

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा जिस घर पर भी बरसती है, वहाँ कभी भी अन्न और धन का अभाव नहीं होता। सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है, लेकिन जब बात घर में सुख, शांति, समृद्धि और वैभव लाने की हो, तो गुरुवार का दिन सबसे खास माना जाता है। गुरुवार का यह दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी दोनों की संयुक्त पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन सच्चे मन से की गई आराधना जीवन के सभी आर्थिक संकटों को दूर कर देती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गुरुवार के दिन का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति से जुड़ा हुआ है, और बृहस्पति ग्रह को सुख, समृद्धि, वैवाहिक जीवन और धन का कारक माना जाता है। भगवान विष्णु को इस दिन का स्वामी माना गया है। जब कोई व्यक्ति गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा करता है, तो उससे देवगुरु बृहस्पति भी मजबूत होते हैं। इसके साथ ही, जहाँ भगवान विष्णु विराजमान होते हैं, वहाँ माता लक्ष्मी स्वतः ही निवास करती हैं। यही कारण है कि इस दिन को धन प्राप्ति और वित्तीय स्थिरता के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

सूर्योदय से पहले उठकर स्नान और संकल्प का महत्व

गुरुवार के दिन की शुरुआत यदि सही तरीके से हो, तो इसका पूरा फल प्राप्त होता है। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए और स्नान के पानी में थोड़ा सा गंगाजल या एक चुटकी हल्दी मिला लेनी चाहिए। हल्दी का संबंध बृहस्पति और भगवान विष्णु से है। स्नान करने के बाद पीले रंग के वस्त्र धारण करना इस दिन बेहद शुभ माना जाता है। पीला रंग भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। वस्त्र पहनने के बाद अपने मन में यह संकल्प लें कि आज के दिन आप पूरे विधि-विधान और निष्ठा के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करेंगे।

पूजा घर की शुद्धि और पीतांबर सेटअप

पूजा की शुरुआत करने से पहले अपने घर के मंदिर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें। यदि संभव हो तो मंदिर की सफाई के बाद गंगाजल का छिड़काव करके उसे पवित्र कर लें। एक साफ चौकी या पाटा रखें और उस पर पीला कपड़ा बिछाएं। इस पीले वस्त्र पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति को स्थापित करें। भगवान विष्णु को पीला फूल, पीला चंदन, और केले का भोग बेहद प्रिय है, इसलिए पूजा की थाली में इन चीजों को जरूर शामिल करें।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजन विधि

चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करने के बाद सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें ताकि पूजा निर्विघ्न संपन्न हो। इसके बाद भगवान विष्णु को पीले चंदन का तिलक लगाएं और माता लक्ष्मी को कुमकुम या सिंदूर अर्पित करें। भगवान को पीले फूलों की माला या ताजे पीले फूल समर्पित करें। पूजा के दौरान धूप और घी का दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय मन में यह भाव रखें कि यह दीपक आपके घर के सारे अंधकार और आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए प्रज्वलित किया जा रहा है।

भोग और प्रसाद का विशेष महत्व

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को भोग लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि प्रसाद सात्विक और शुद्ध हो। गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को पीले रंग की मिठाई, बेसन के लड्डू, या चने की दाल और गुड़ का भोग लगाना अति उत्तम माना जाता है। इसके अलावा, माता लक्ष्मी को खीर या मखाने का भोग बहुत प्रिय है। भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य रखें, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। पूजा संपन्न होने के बाद इस प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांट दें।

गुरुवार के दिन किए जाने वाले अचूक और सरल उपाय

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Image Credit: Gemini

यदि आपके जीवन में लगातार आर्थिक तंगी बनी हुई है या धन टिकता नहीं है, तो गुरुवार के दिन कुछ खास उपाय करने से बहुत लाभ मिलता है। इन उपायों को करने के लिए किसी बड़े अनुष्ठान की जरूरत नहीं होती, बस आपकी श्रद्धा और नियम मायने रखते हैं।

केले के पेड़ की पूजा का विधान

गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है। सुबह स्नान के बाद केले के पेड़ की जड़ में थोड़ा सा जल अर्पित करें, जिसमें चुटकीभर हल्दी और थोड़ा सा गुड़ मिला हो। इसके बाद चने की दाल का भोग लगाएं और घी का दीपक जलाएं। पेड़ की परिक्रमा करते हुए अपने जीवन की आर्थिक परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करें। ध्यान रखें कि इस दिन केले के फल का सेवन नहीं किया जाता है।

दान और सहृदयता का पुण्य

गुरुवार के दिन दान करने का बहुत बड़ा महत्व है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार पीली चीजों का दान करना चाहिए, जैसे चने की दाल, पीले वस्त्र, हल्दी, केला या पीले रंग की मिठाई। किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अन्न का दान करने से घर में कभी भी भंडार खाली नहीं होते हैं। दान हमेशा गुप्त रूप से और मन में बिना किसी अहंकार के करना चाहिए, तभी उसका पूरा धार्मिक फल प्राप्त होता है।

विष्णु सहस्रनाम और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ

पूजा के समय या दिन में किसी भी समय शांत बैठकर विष्णु सहस्रनाम या श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए। यदि आप पूरा पाठ पढ़ने में असमर्थ हैं, तो “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्” मंत्र का कम से कम एक माला जाप जरूर करें। मंत्रों के उच्चारण से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मकता तथा वैभव का प्रवेश होता है।

आहार और खान-पान से जुड़े जरूरी नियम

गुरुवार के दिन कुछ बातों का विशेष परहेज रखना चाहिए। इस दिन नमक का सेवन कम से कम करना चाहिए या हो सके तो एक समय बिना नमक का भोजन करें। इसके अलावा, इस दिन बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना, नाखून काटने या कपड़े धोने जैसे कार्यों से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे घर की सुख-समृद्धि और गुरु ग्रह का बल कमजोर होता है। सात्विक आहार अपनाएं और किसी का भी अपमान करने से बचें।

संध्या के समय दीपदान और मुख्य द्वार की शुद्धि

गुरुवार की शाम का समय भी पूजा के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होता है। सूर्यास्त के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि संध्या के समय माता लक्ष्मी का आगमन पृथ्वी पर होता है और जिस घर का मुख्य द्वार साफ और प्रज्वलित होता है, माता वहीं प्रवेश करती हैं। शाम को मंदिर में भी एक दीपक जलाकर भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें और पूरे घर में घंटी या शंख की ध्वनि करें।

जीवन में बदलाव

नियम और निष्ठा के साथ किया गया हर काम अपने साथ सकारात्मक परिणाम लेकर आता है। गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह आपके मन में अनुशासन, सकारात्मकता और आभार की भावना पैदा करती है। जब आप नियमित रूप से इन नियमों का पालन करते हैं, तो आपके जीवन में मानसिक शांति के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता भी आने लगती है। सच्चे मन और अटूट विश्वास के साथ की गई पूजा कभी भी निष्फल नहीं होती, और भक्त के घर में सदैव सुख-समृद्धि का वास रहता है।

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