Hanuman Ji ko sindoor chadhane ki parampara

हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है? (रोचक कथा और रहस्य)

August 27, 2026 • Created by Mahadev Aura

जब भी हम किसी हनुमान मंदिर में जाते हैं, हमारी नजर सबसे पहले उनके पूरे विग्रह (शरीर) पर चढ़ी हुई सिंदूर की परत पर पड़ती है। हनुमान जी की पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन कभी आपने सोचा है कि आखिर हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है? इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प और प्रेम से भरी पौराणिक कथा है, जिसे जानकर आपकी श्रद्धा और भी ज्यादा बढ़ जाएगी।

आइए, इस रोचक कथा और इसके आध्यात्मिक महत्व को बिल्कुल सरल और गहरे अंदाज में समझते हैं।

1. सीता माता की मांग का सिंदूर और एक अनोखा प्रेम प्रसंग

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Image Credit: Gemini

यह कथा रामायण काल से जुड़ी एक लोकप्रिय धार्मिक कथा है। एक दिन माता सीता अपनी मांग में सिंदूर लगा रही थीं। तभी वहां हनुमान जी आ पहुंचे। हनुमान जी का स्वभाव बचपन से ही अपने प्रभु श्री राम और माता सीता के प्रति अतुल्य प्रेम और समर्पण से भरा था। उन्होंने बड़े ही आश्चर्य और भोलेपन से माता सीता से पूछा, “माता, आप अपनी मांग में यह लाल रंग की चीज रोज क्यों लगाती हैं? इसका रहस्य क्या है?”

माता सीता हनुमान जी के इस भोले सवाल पर मुस्कुराईं और स्नेह से बोलीं, “पुत्र, यह सिंदूर है। धार्मिक परंपराओं में सिंदूर को सुहाग और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। मैं इसे अपने स्वामी, श्री राम के प्रति अपने प्रेम और मंगल की भावना के रूप में लगाती हूं।”

हनुमान जी ने जब यह सुना तो उनका बालक मन और श्री राम के प्रति प्रेम और भी गहरा हो गया। उन्होंने सोचा—जब थोड़ा सा सिंदूर माता सीता अपने प्रभु के मंगल और लंबी आयु की कामना के लिए लगाती हैं, तो अगर मैं अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूं, तो मेरे प्रभु श्री राम के प्रति मेरा प्रेम और समर्पण कितना बड़ा होगा।

2. जब हनुमान जी ने पूरे शरीर पर लगा लिया सिंदूर (अनन्य भक्ति का प्रतीक)

बिना एक पल सोचे, हनुमान जी ने वही किया जो उनके प्रेम की सीमा को दर्शाता था। उन्होंने सिंदूर लेकर अपने पूरे शरीर पर इस तरह लगा लिया कि उनका एक-एक रोम सिंदूर से लाल हो गया। उसके बाद वे सीधे श्री राम की सभा में जा पहुंचे।

जब श्री राम ने हनुमान जी के इस रूप को देखा, तो वे हैरान रह गए। उन्होंने प्रेम से पूछा, “हनुमान, यह तुमने अपने शरीर पर क्या कर रखा है? यह सिंदूर क्यों लगाया है?”

हनुमान जी ने हाथ जोड़कर बड़ी विनम्रता से कहा, “प्रभु, माता ने बताया था कि सिंदूर उनके लिए आपके मंगल और सौभाग्य की भावना से जुड़ा है। मैंने सोचा कि अगर मैं पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूं, तो आपके प्रति अपना पूरा प्रेम और समर्पण दिखा सकता हूं।”

श्री राम समझ गए कि यह कोई श्रृंगार नहीं, बल्कि उनके परम भक्त का निष्काम प्रेम और अनन्य समर्पण है। इसी लोकप्रिय कथा के आधार पर हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा को उनकी भक्ति, समर्पण और श्री राम के प्रति प्रेम से जोड़ा जाता है।

3. ज्योतिष और धार्मिक परंपरा में सिंदूर का महत्व

धार्मिक कथा के अलावा, ज्योतिषीय और धार्मिक परंपराओं में भी सिंदूर चढ़ाने के पीछे गहरे महत्व बताए गए हैं:

मंगल ग्रह से संबंध: हनुमान जी की उपासना को मंगल ग्रह से जुड़ी ज्योतिषीय परंपराओं में भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सिंदूर का रंग लाल होता है, जिसे परंपराओं में शक्ति, साहस और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मंगल से जुड़े कष्टों या मंगल दोष की स्थिति में हनुमान जी की पूजा करने की सलाह दी जाती है।

शक्ति और साहस का प्रतीक: धार्मिक परंपराओं में लाल रंग को शक्ति, वीरता, उत्साह और ऊर्जा से जोड़ा जाता है। इसी वजह से हनुमान जी की पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व माना जाता है। सिंदूर अर्पित करना भक्त के लिए हनुमान जी के साहस, शक्ति और समर्पण को याद करने का एक माध्यम भी है।

4. सिंदूर चढ़ाने के सही नियम और सावधानियां

अगर आप भी हनुमान जी को सिंदूर चढ़ा रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। पूजा की विधि अलग-अलग मंदिरों और परंपराओं के अनुसार कुछ भिन्न हो सकती है, इसलिए अपने स्थानीय मंदिर की परंपरा का भी सम्मान करना चाहिए।

दिन का महत्व: हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने के लिए मंगलवार (Tuesday) और शनिवार (Saturday) को विशेष महत्व दिया जाता है। इन दिनों में भक्त श्रद्धा के साथ हनुमान जी की पूजा और सिंदूर अर्पण करते हैं।

चोला चढ़ाने की विधि: अगर आप हनुमान जी को चोला चढ़ाना चाहते हैं, तो कई परंपराओं में सिंदूर के साथ चमेली के तेल का प्रयोग किया जाता है। चोला चढ़ाने की पूरी विधि मंदिर और स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए बिना जानकारी के स्वयं चोला चढ़ाने के बजाय मंदिर के पुजारी की सलाह लेना उचित है।

मन की शुद्धि: सिंदूर चढ़ाते समय मन में किसी भी तरह का स्वार्थ नहीं होना चाहिए। केवल “राम-राम” का जाप करते हुए पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ हनुमान जी का स्मरण करना भक्ति की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

5. हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने का आध्यात्मिक अर्थ

हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाना सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह उनके श्री राम के प्रति निष्काम प्रेम और पूर्ण समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है।

निष्काम भक्ति: हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि भक्ति में स्वार्थ से ज्यादा समर्पण और सेवा की भावना महत्वपूर्ण होती है।

अहंकार का त्याग: हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करते समय भक्त अपने अहंकार को छोड़कर भगवान के चरणों में समर्पण की भावना रखने का संकल्प कर सकता है।

साहस और शक्ति: सिंदूर के लाल रंग को परंपराओं में शक्ति और वीरता से जोड़ा जाता है। हनुमान जी का स्मरण भक्त के अंदर भी साहस और आत्मविश्वास की भावना जगाने का माध्यम बन सकता है।

6. निष्कर्ष: भक्ति का असली रूप

हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाना सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि भक्ति में सच्ची भावना, प्रेम और समर्पण का विशेष महत्व होता है। जैसे हनुमान जी ने अपने भोलेपन और श्री राम के प्रति प्रेम में पूरा शरीर सिंदूर से रंग लिया था, वैसे ही हमें भी अपने अहंकार को कम करके पूरी श्रद्धा के साथ अपने इष्ट के चरणों में समर्पित होने की प्रेरणा लेनी चाहिए।

जब आप सच्चे मन से बजरंगबली को सिंदूर अर्पित करते हैं, तो यह आपके लिए उनकी भक्ति, साहस और समर्पण को याद करने का एक पवित्र माध्यम बन सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी की भक्ति से भक्त को संकटों का सामना करने का साहस और मनोबल प्राप्त होता है।

आपको यह रोचक कथा कैसी लगी? क्या आप इस आर्टिकल से जुड़े किसी और पहलू पर भी कुछ जानना चाहते हैं?