✨ Welcome to DivineWorld | Wisdom • Vastu • Rashifal • Spiritual Knowledge 🙏
Raksha Bandhan 2026 पर भाई की कलाई पर राखी बांधती बहन

Raksha Bandhan 2026: कब है राखी? जानें शुभ मुहूर्त, पूर्णिमा तिथि, भद्रा, पूजा विधि और पौराणिक कथा

By Deepak Kumar
Published: गुरुवार, 13 अगस्त 2026 at 4:49 PM

भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का पवित्र पर्व रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेते हैं।

Raksha Bandhan 2026 की तारीख, पूर्णिमा तिथि और राखी बांधने के शुभ समय को लेकर कई लोगों के मन में सवाल हैं। आइए जानते हैं 2026 में रक्षाबंधन कब है, पूर्णिमा कब शुरू और समाप्त होगी, भद्रा कब रहेगी, राखी कब बांधनी चाहिए और इस पर्व की पूजा विधि क्या है।

Raksha Bandhan 2026 कब है?

रक्षाबंधन 2026 में शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा।

इस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि रहेगी। पंचांग गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 बजे समाप्त होगी।

Raksha Bandhan 2026 की महत्वपूर्ण जानकारी

विवरणसमय / तारीख
रक्षाबंधन 202628 अगस्त 2026, शुक्रवार
पूर्णिमा तिथि आरंभ27 अगस्त 2026, सुबह 09:08 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त28 अगस्त 2026, सुबह 09:48 बजे
भद्रा28 अगस्त के सूर्योदय से पहले समाप्त
राखी बांधने का समयस्थानीय पंचांग के अनुसार, भद्रा समाप्त होने के बाद शुभ समय

रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 को पड़ने की पुष्टि पंचांग कैलेंडर में भी होती है।

ध्यान दें: पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। भारत के अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग गणना में अंतर होने के कारण राखी बांधने के exact शुभ समय में भी कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना सबसे उचित रहेगा।

Raksha Bandhan 2026 शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय भद्रा काल से बचने की धार्मिक परंपरा है। 2026 की पंचांग गणना के अनुसार 28 अगस्त के सूर्योदय से पहले भद्रा समाप्त हो जाएगी। इसलिए 28 अगस्त को सूर्योदय के बाद राखी बांधने के समय भद्रा की बाधा नहीं रहेगी।

28 अगस्त 2026 को राखी बांधने के लिए अपने शहर के स्थानीय सूर्योदय के बाद उपलब्ध शुभ समय को ध्यान में रखें। पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह 09:48 बजे समाप्त होगी, इसलिए कई स्थानों पर सुबह का समय महत्वपूर्ण रहेगा।

भारत के अलग-अलग शहरों में सूर्योदय का समय अलग होता है। दिल्ली, मुंबई, पटना, लखनऊ, जयपुर, कोलकाता, भोपाल, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में स्थानीय समय अलग होने के कारण राखी बांधने के समय की शुरुआत भी अलग हो सकती है।

इसलिए राखी बांधने के exact शुभ मुहूर्त के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग को जरूर देखें।

क्या 2026 में रक्षाबंधन पर भद्रा रहेगी?

राखी बांधने के समय भद्रा नहीं रहेगी।

पंचांग गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 के सूर्योदय से पहले भद्रा समाप्त हो जाएगी। इसलिए सूर्योदय के बाद राखी बांधने के समय भद्रा की बाधा नहीं रहेगी।

Raksha Bandhan Puja Vidhi: राखी बांधने की सही विधि

रक्षाबंधन पर भाई और बहन श्रद्धा और प्रेम के साथ पूजा करके राखी बांध सकते हैं। सामान्य पूजा विधि इस प्रकार है:

raksha bandhan puja thali rakhi
Image Credit: Gemini

पूजा की थाली तैयार करें

एक साफ थाली में ये सामग्री रखें:

  • राखी
  • रोली या कुमकुम
  • अक्षत यानी साबुत चावल
  • चंदन
  • दीपक
  • फूल
  • मिठाई
  • जल

भगवान का स्मरण करें

राखी बांधने से पहले घर के मंदिर में भगवान का स्मरण करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

भाई को तिलक लगाएं

बहन भाई के माथे पर रोली, कुमकुम या चंदन का तिलक लगाएं और उसके ऊपर अक्षत लगाएं।

राखी बांधें

शुभ समय में भाई की कलाई पर राखी बांधें और उसके सुख, स्वास्थ्य, सफलता तथा लंबी आयु की कामना करें।

आरती करें और मिठाई खिलाएं

राखी बांधने के बाद भाई की आरती करें और उसे मिठाई खिलाएं।

उपहार और आशीर्वाद

भाई अपनी बहन को प्रेमपूर्वक उपहार दे और दोनों एक-दूसरे के सुखी एवं स्वस्थ जीवन की कामना करें।

राखी बांधते समय यह प्रसिद्ध रक्षा सूत्र मंत्र बोला जाता है:

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

मंत्र का अर्थ

जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दैत्यराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षा सूत्र! तुम अपने संकल्प से कभी विचलित न होना और रक्षा करना।

यह मंत्र रक्षाबंधन और रक्षा सूत्र की परंपरा में व्यापक रूप से प्रचलित है।

Raksha Bandhan Ki Pauranik Katha

रक्षाबंधन से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। इनमें श्रीकृष्ण-द्रौपदी और राजा बलि-माता लक्ष्मी की कथाएं विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा रक्षा सूत्र से जुड़ी प्राचीन कथाओं में इंद्र और शची की कथा भी मिलती है।

श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा

महाभारत से जुड़ी लोकप्रिय लोककथा के अनुसार, एक अवसर पर श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लग गई और उससे रक्त निकलने लगा। यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया।

द्रौपदी के इस स्नेह और समर्पण से श्रीकृष्ण अत्यंत प्रभावित हुए। लोकप्रचलित कथा में माना जाता है कि उन्होंने द्रौपदी की रक्षा करने का संकल्प लिया।

महाभारत के चीरहरण प्रसंग में जब द्रौपदी संकट में थीं, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लाज की रक्षा की। यह लोकप्रिय कथा प्रेम, विश्वास और रक्षा के भाव का प्रतीक मानी जाती है।

राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा

रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध कथा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि से संबंधित है।

प्रचलित कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। भगवान ने अपने तीन पगों में तीनों लोक नाप लिए। इसके बाद राजा बलि की भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनकी इच्छा का सम्मान किया।

कथा के एक प्रचलित रूप के अनुसार भगवान विष्णु के राजा बलि के यहां रहने के कारण माता लक्ष्मी उन्हें वापस वैकुंठ ले जाना चाहती थीं। माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर अपना भाई बनाया और उनसे भगवान विष्णु को वापस वैकुंठ ले जाने का वर मांगा।

राजा बलि ने माता लक्ष्मी की इच्छा स्वीकार कर ली। यह कथा रक्षाबंधन के भाई-बहन के पवित्र संबंध और प्रेम की भावना से जोड़ी जाती है।

इंद्र और शची की कथा

रक्षा सूत्र से जुड़ी एक प्राचीन कथा इंद्र और उनकी पत्नी शची से भी संबंधित है। प्रचलित धार्मिक कथा के अनुसार देवताओं और असुरों के युद्ध के समय इंद्र की पत्नी शची ने इंद्र की रक्षा के लिए पवित्र रक्षा सूत्र बांधा। इसके बाद इंद्र को विजय प्राप्त हुई।

यह कथा रक्षा सूत्र को सुरक्षा, विश्वास और मंगलकामना के प्रतीक के रूप में देखने की धार्मिक परंपरा से जुड़ी हुई है।

रक्षाबंधन के दिन आप इन धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं का पालन कर सकते हैं:

  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • भगवान का स्मरण और पूजा करें।
  • भाई की कलाई पर शुभ समय में राखी बांधें।
  • भाई के सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करें।
  • परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करें।
  • भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और सम्मान बनाए रखने का संकल्प लें।

Raksha Bandhan Par Kya Na Karein?

  • भद्रा काल में राखी बांधने से बचें।
  • टूटी या खराब राखी का इस्तेमाल न करें।
  • पूजा और राखी बांधने के समय जल्दबाजी न करें।
  • भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और सम्मान को सबसे अधिक महत्व दें।
  • exact मुहूर्त के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।

Raksha Bandhan 2026 में कब है

उत्तर: रक्षाबंधन 2026 में 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

2026 में पूर्णिमा तिथि कब शुरू होगी

उत्तर: पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 बजे शुरू होगी।

2026 में पूर्णिमा तिथि कब समाप्त होगी

उत्तर: पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 बजे समाप्त होगी।

क्या 2026 में रक्षाबंधन पर भद्रा रहेगी

उत्तर: पंचांग गणना के अनुसार 28 अगस्त 2026 के सूर्योदय से पहले भद्रा समाप्त हो जाएगी, इसलिए सूर्योदय के बाद राखी बांधने के समय भद्रा की बाधा नहीं रहेगी।

2026 में राखी बांधने का शुभ समय क्या है

उत्तर: 28 अगस्त 2026 को भद्रा समाप्त होने के बाद और अपने शहर के स्थानीय सूर्योदय के अनुसार उपलब्ध शुभ समय में राखी बांधना उचित माना जाता है। पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त को सुबह 09:48 बजे समाप्त होगी। शहर के अनुसार exact मुहूर्त अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर है।

राखी किस हाथ में बांधनी चाहिए

उत्तर: हिंदू पारिवारिक परंपरा में बहन द्वारा भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधने की परंपरा प्रचलित है।

Q7. राखी बांधते समय कौन सा मंत्र बोलें?

उत्तर: प्रचलित रक्षा सूत्र मंत्र है:

“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”

रक्षाबंधन पर क्या पूजा करनी चाहिए

उत्तर: घर के मंदिर में भगवान का स्मरण करके दीपक जलाएं, भाई को तिलक लगाएं, अक्षत लगाएं, राखी बांधें और मिठाई खिलाकर भाई के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

क्या रक्षाबंधन पर भद्रा में राखी बांध सकते हैं?

उत्तर: धार्मिक परंपरा में भद्रा के दौरान राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है। 2026 में भारत के लिए उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।

क्या सभी शहरों में राखी बांधने का समय एक जैसा होगा

उत्तर: नहीं। सूर्योदय और स्थानीय पंचांग गणना में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार exact शुभ मुहूर्त देखना सबसे उचित रहेगा।

निष्कर्ष

Raksha Bandhan 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 बजे समाप्त होगी। पंचांग गणना के अनुसार 28 अगस्त के सूर्योदय से पहले भद्रा समाप्त हो जाएगी।

राखी बांधने के लिए अपने शहर के स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार उपलब्ध शुभ समय को ध्यान में रखना चाहिए। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण exact local मुहूर्त भी अलग हो सकता है।

रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के प्रेम, विश्वास, सम्मान और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का पावन अवसर भी है।

इस रक्षाबंधन पर सभी भाई-बहनों के जीवन में सुख, शांति, प्रेम और समृद्धि बनी रहे।

इस आर्टिकल को शेयर करें