सनातन धर्म में रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधती हैं और उनकी लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करती हैं।
रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का त्योहार ही नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का भी अवसर है। धार्मिक परंपराओं में इस दिन रक्षा सूत्र बांधते समय पूजा-विधि, शुभ समय, दिशा और मंत्रोच्चारण का विशेष महत्व बताया गया है।
राखी बांधने की सही दिशा
कई धार्मिक और वास्तु परंपराओं में मांगलिक कार्य करते समय दिशा का ध्यान रखना शुभ माना जाता है। रक्षाबंधन के अवसर पर भी भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर करके राखी बांधना शुभ माना जाता है।
भाई का मुख किस दिशा में होना चाहिए
राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। पूर्व दिशा को सूर्य देव और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है, जबकि उत्तर दिशा को समृद्धि और कुबेर की दिशा माना जाता है।
हालांकि, दिशा को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में मान्यताएं अलग हो सकती हैं। इसलिए इसे कठोर नियम के बजाय शुभ परंपरा के रूप में समझना उचित है।
बहन किस दिशा में बैठे?
बहन भाई के सामने बैठकर आसानी से पूजा और राखी बांध सकती है। बहन के लिए किसी एक दिशा को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं है। मुख्य रूप से भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखने की परंपरा प्रचलित है।
रक्षा सूत्र बांधने का मंत्र

राखी बांधते समय पारंपरिक रूप से यह मंत्र बोला जाता है:
ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
मंत्र का सरल हिंदी अर्थ
जिस रक्षा सूत्र से महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षा सूत्र! तुम स्थिर रहो और सदैव इसकी रक्षा करो।
धार्मिक मान्यताओं में मंत्रोच्चारण के साथ रक्षा सूत्र बांधना विशेष शुभ माना जाता है। हालांकि, राखी बांधने के लिए मंत्र का उच्चारण अनिवार्य नहीं है। श्रद्धा और प्रेम के साथ राखी बांधना इस पर्व की मूल भावना है।
राखी बांधने की चरणबद्ध विधि
1. पूजा की थाली सजाएं
सबसे पहले एक स्वच्छ पूजा की थाली तैयार करें। इसमें रोली या कुमकुम, अक्षत, चंदन, दीपक, राखी, मिठाई और आवश्यकता अनुसार नारियल आदि रख सकते हैं।
2. दीपक प्रज्वलित करें
पूजा की शुरुआत दीपक जलाकर करें। इसके बाद भगवान गणेश या अपने इष्ट देव का स्मरण करके पूजा शुरू करना शुभ माना जाता है।
3. भाई को तिलक लगाएं
भाई के माथे पर रोली, कुमकुम या चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद तिलक पर साबुत अक्षत यानी अखंडित चावल लगाएं।
4. भाई की कलाई पर राखी बांधें
परंपरा के अनुसार बहन भाई की दाहिनी कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधती है। राखी बांधते समय ऊपर दिया गया रक्षा सूत्र मंत्र बोला जा सकता है।
कुछ परंपराओं में रक्षा सूत्र में तीन गांठें लगाने को शुभ माना जाता है और इन्हें त्रिदेव से जोड़ा जाता है।
5. आरती करें
राखी बांधने के बाद भाई की आरती करें और उनके सुख, स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा समृद्धि की प्रार्थना करें।
6. मिठाई खिलाएं
आरती के बाद भाई का मुंह मीठा कराएं और उनके मंगलमय जीवन की कामना करें।
7. आशीर्वाद और उपहार
भाई अपनी बहन के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करे तथा परंपरा के अनुसार उसे उपहार दे सकता है। इस अवसर पर भाई-बहन एक-दूसरे के सुख और समृद्धि की कामना करें।
रक्षाबंधन के 5 जरूरी नियम
1. भद्रा काल का ध्यान रखें
रक्षाबंधन पर राखी बांधने से पहले उस वर्ष की भद्रा समाप्ति और शुभ मुहूर्त की जानकारी जरूर देखनी चाहिए। धार्मिक परंपराओं में भद्रा काल को राखी बांधने जैसे मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।
2. दाहिनी कलाई पर राखी बांधने की परंपरा
भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। अलग-अलग समुदायों और परिवारों में रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा अलग हो सकती है।
3. शुभ रंगों को प्राथमिकता दें
लाल, पीला, नारंगी और केसरिया जैसे रंगों की राखी को पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। काले रंग की राखी को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में मान्यताएं अलग हो सकती हैं।
4. अखंडित अक्षत का प्रयोग करें
पूजा में साबुत चावल यानी अखंडित अक्षत का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। अक्षत को पूर्णता, मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
5. ईष्ट देव को पहले राखी अर्पित करने की परंपरा
कई परिवारों में भाई को राखी बांधने से पहले भगवान गणेश, महादेव, श्रीकृष्ण या अपने ईष्ट देव को राखी अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधी जाती है।
क्या रक्षाबंधन पर सिर ढंकना जरूरी है
कुछ पारंपरिक परिवारों में पूजा के समय भाई और बहन दोनों के सिर ढंकने की परंपरा होती है। इसे धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसे सभी के लिए अनिवार्य नियम नहीं माना जाना चाहिए।
यदि आपके परिवार में पूजा के समय सिर ढंकने की परंपरा है, तो उसका पालन श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।
रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा: राजा बलि और माता लक्ष्मी
रक्षाबंधन पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा को राजा बलि और माता लक्ष्मी की पौराणिक कथा से भी जोड़ा जाता है। यह कथा धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं में प्रचलित है।
कथा का सार
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर असुरराज राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी। राजा बलि ने भगवान वामन को तीन पग भूमि देने का वचन दिया और अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।
राजा बलि की दानशीलता और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया। कथा के अनुसार, राजा बलि के आग्रह पर भगवान विष्णु पाताल लोक में रहने लगे।
भगवान विष्णु के पाताल लोक चले जाने से माता लक्ष्मी चिंतित हुईं। पौराणिक कथा के अनुसार, देवर्षि नारद की सलाह पर माता लक्ष्मी पाताल लोक पहुंचीं और राजा बलि को अपना भाई मानकर उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा।
रक्षा सूत्र बंधवाने के बाद राजा बलि ने माता लक्ष्मी से उपहार मांगने को कहा। तब माता लक्ष्मी ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया और भगवान विष्णु को वापस वैकुंठ ले जाने का वचन मांगा।
राजा बलि ने अपना वचन निभाया और भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी के साथ वैकुंठ जाने की अनुमति दी। इसी कथा को रक्षाबंधन की परंपरा और रक्षा सूत्र के महत्व से जोड़कर देखा जाता है।
राखी किस हाथ में बांधनी चाहिए
परंपरागत रूप से बहन भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधती है। इसे शुभ माना जाता है।
क्या बिना मंत्र बोले राखी बांधी जा सकती है
हां, राखी बिना मंत्र के भी बांधी जा सकती है। हालांकि, धार्मिक परंपरा में “ॐ येन बद्धो बली राजा…” मंत्र का उच्चारण करते हुए रक्षा सूत्र बांधना शुभ माना जाता है।
राखी बांधते समय भाई का मुख किस दिशा में होना चाहिए
कई धार्मिक और वास्तु परंपराओं के अनुसार भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। हालांकि, इसे अनिवार्य नियम के बजाय शुभ परंपरा के रूप में समझना चाहिए।
क्या राखी बांधते समय सिर ढंकना जरूरी है
सिर ढंकना कुछ परिवारों की पारंपरिक पूजा-विधि का हिस्सा है, लेकिन इसे सभी के लिए अनिवार्य नियम नहीं माना जाता।
क्या राखी बांधने से पहले भगवान को राखी अर्पित करनी चाहिए
कई परिवारों में पहले अपने इष्ट देव, भगवान गणेश, महादेव या श्रीकृष्ण को राखी अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद भाई को राखी बांधी जाती है।
निष्कर्ष
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान का पावन पर्व है। इस दिन राखी बांधते समय श्रद्धा, प्रेम और परिवार की परंपराओं का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके राखी बांधना, रक्षा सूत्र मंत्र का उच्चारण करना, तिलक और आरती करना जैसी परंपराएं इस पर्व को और भी मंगलमय बनाती हैं।
रक्षाबंधन 2026 पर शुभ मुहूर्त और भद्रा काल का ध्यान रखते हुए विधि-विधान से राखी बांधें और भाई-बहन के सुखी, स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन की मंगलकामना करें।




















