हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती महिला

हरतालिका तीज: संपूर्ण व्रत कथा, पूजा विधि, नियम और पावन महत्व

By Deepak Kumar
Published: सोमवार, 31 अगस्त 2026 at 11:14 PM

हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए सालभर में कई व्रत और त्योहार आते हैं, लेकिन हरतालिका तीज का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन, दांपत्य सुख और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

यह व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि माता पार्वती की कठोर तपस्या, निष्ठा और भगवान शिव के प्रति उनके अटूट समर्पण से जुड़ी पौराणिक कथा को भी दर्शाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की थी।

आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं हरतालिका तीज की पौराणिक कथा, पूजा विधि, पूजा सामग्री और व्रत से जुड़े महत्वपूर्ण नियम।

हरतालिका तीज का पौराणिक इतिहास और नाम के पीछे की कहानी

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने लंबे समय तक कठिन साधना की और भगवान शिव की आराधना में अपना मन लगाया।

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से जुड़ी मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने एकांत स्थान पर बालू या मिट्टी से शिवलिंग बनाया और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा एवं तपस्या की। उनकी कठोर साधना और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया।

‘हरतालिका’ नाम क्यों पड़ा?

हरतालिका नाम की पौराणिक व्याख्या ‘हरत’ और ‘आलिका’ शब्दों से जुड़ी मानी जाती है। ‘आलिका’ का अर्थ सखी या सहेली से जोड़ा जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार, माता पार्वती की सखियां उन्हें उनके पिता के घर से एक गुप्त स्थान पर ले गई थीं, ताकि वे अपनी इच्छा के अनुसार भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या कर सकें।

इसी कारण इस व्रत को हरतालिका तीज कहा जाने लगा। यह कथा माता पार्वती की दृढ़ इच्छा, तपस्या और भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट भक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

हरतालिका तीज व्रत के महत्वपूर्ण नियम

हरतालिका तीज का व्रत कठिन व्रतों में गिना जाता है। हालांकि, व्रत के नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की धार्मिक परंपराओं के अनुसार कुछ अलग हो सकते हैं।

  1. निर्जला उपवास: हरतालिका तीज पर कई महिलाएं श्रद्धानुसार निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता। व्रत की अवधि और पारण की परंपरा परिवार तथा क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठोर उपवास करने के बजाय अपनी स्थिति के अनुसार निर्णय लेना उचित है।
  2. रात्रि जागरण: हरतालिका तीज पर रात्रि जागरण की भी धार्मिक परंपरा मिलती है। व्रत रखने वाली महिलाएं रात में भजन-कीर्तन, शिव-पार्वती की कथा और मंत्र जाप करते हुए जागरण कर सकती हैं।
  3. मिट्टी या बालू की प्रतिमा: इस व्रत की पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू या मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की पूजा करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रतिमा बनाकर या तैयार प्रतिमा के माध्यम से पूजा कर सकते हैं।

हरतालिका तीज पूजा सामग्री लिस्ट

यदि आप या आपके घर में कोई हरतालिका तीज का व्रत रख रहा है, तो पूजा से पहले आवश्यक सामग्री तैयार कर लेना सुविधाजनक रहता है।

  • भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा
  • बालू या मिट्टी, यदि प्रतिमा स्वयं बनानी हो
  • सुहाग का सामान जैसे साड़ी, चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, महावर, आलता और कंगन
  • माता पार्वती के लिए वस्त्र और श्रृंगार सामग्री
  • भगवान शिव के लिए वस्त्र
  • बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते और फूल
  • दूर्वा घास
  • जनेऊ और कलावा
  • धूप, दीप, कपूर और अगरबत्ती
  • शुद्ध घी
  • पंचामृत
  • फल, मिठाई और नैवेद्य
  • कलश, नारियल, सुपारी और पान के पत्ते
  • रोली और अन्य पूजा सामग्री

पूजा सामग्री में क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है।

हरतालिका तीज की सरल और सही पूजा विधि

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Image Credit: Gemini

प्रातःकाल पूजा का महत्व

हरतालिका तीज पर प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा की तैयारी की जाती है। कई धार्मिक परंपराओं में सुबह शिव-पार्वती की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। यदि किसी कारण सुबह पूजा करना संभव न हो, तो स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार प्रदोष काल में भी पूजा की जा सकती है।

पूजा स्थान की सजावट

पूजा स्थान को साफ करके एक चौकी पर स्वच्छ लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थान को फूलों, पत्तियों और दीपक से श्रद्धानुसार सजाया जा सकता है।

गणेश जी और शिव-पार्वती की पूजा

सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का विधिपूर्वक पूजन करें। भगवान शिव को बेलपत्र, फूल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री और श्रृंगार सामग्री श्रद्धानुसार अर्पित की जा सकती है।

हरतालिका तीज व्रत कथा का पाठ

पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा पढ़ना या सुनना महत्वपूर्ण माना जाता है। कथा के माध्यम से माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव के प्रति उनकी भक्ति का स्मरण किया जाता है।

आरती, जागरण और दान

पूजा के अंत में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की आरती करें। श्रद्धानुसार रात में भजन-कीर्तन और जागरण किया जा सकता है।

अगले दिन प्रातः पूजा के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार हवन, दान या सुहाग सामग्री अर्पित की जा सकती है। इसके बाद उचित समय और स्थानीय परंपरा के अनुसार व्रत का पारण किया जाता है।

हरतालिका तीज में किन बातों का ध्यान रखें?

हरतालिका तीज के दौरान पूजा स्थान और घर की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के समय मन को शांत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें।

व्रत को केवल कठिन नियमों के रूप में देखने के बजाय इसके पीछे छिपे भक्ति, संयम, धैर्य और दांपत्य प्रेम के भाव को समझना अधिक महत्वपूर्ण है।

निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए आवश्यक या उपयुक्त नहीं हो सकता। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को कठोर उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। धार्मिक आस्था के साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।

हरतालिका तीज का आध्यात्मिक महत्व

हरतालिका तीज की कथा में माता पार्वती की दृढ़ इच्छा, तपस्या और समर्पण का संदेश मिलता है। धार्मिक मान्यताओं में यह व्रत दांपत्य जीवन में सुख-शांति, प्रेम और सौभाग्य की कामना से जुड़ा हुआ है।

इस पर्व का महत्व केवल पति की लंबी आयु या वैवाहिक सुख की कामना तक सीमित नहीं है। यह व्रत व्यक्ति को धैर्य, आत्मसंयम, विश्वास और अपने जीवनसाथी के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों की भी याद दिलाता है।

माता पार्वती की भक्ति हमें यह संदेश देती है कि जीवन में किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए धैर्य, विश्वास और समर्पण का विशेष महत्व होता है।

निष्कर्ष: भक्ति, प्रेम और समर्पण का पावन पर्व

हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र संबंध, माता पार्वती की तपस्या और अटूट भक्ति की याद दिलाने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा, व्रत कथा का श्रवण और शिव-पार्वती का स्मरण किया जाता है।

व्रत और पूजा के नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए धार्मिक मान्यताओं को अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार समझदारी से अपनाना बेहतर है।

इस पावन पर्व का वास्तविक संदेश प्रेम, विश्वास, धैर्य, संयम और समर्पण है। भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और प्रेम बना रहे।

आपको और आपके पूरे परिवार को Mahadev Aura की ओर से हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं!

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