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शरद पूर्णिमा 2026 की चांदनी रात में खीर और माता लक्ष्मी की पूजा

शरद पूर्णिमा 2026: जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा विधि और खीर रखने का महत्व

By Deepak Kumar
Published: मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 at 11:00 AM

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है। सनातन धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस अवसर पर माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर रात में खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा भी निभाई जाती है।

अगर आप जानना चाहते हैं कि शरद पूर्णिमा 2026 में कब है, पूर्णिमा तिथि कब शुरू और समाप्त होगी, पूजा का समय क्या है, व्रत कथा क्या है और खीर को चांदनी में क्यों रखा जाता है, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी है।

शरद पूर्णिमा 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी।

पूर्णिमा तिथि से जुड़ी जानकारी इस प्रकार है:

  • पूर्णिमा तिथि आरंभ: 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:55 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:41 बजे
  • शरद पूर्णिमा: 25 अक्टूबर 2026, रविवार

रात्रि में पूर्णिमा तिथि रहने के कारण शरद पूर्णिमा की पूजा और जागरण 25 अक्टूबर की रात किया जाएगा।

शरद पूर्णिमा 2026 पूजा का शुभ समय

शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की पूजा और जागरण करने की परंपरा है। कई धार्मिक मान्यताओं में मध्य रात्रि के समय लक्ष्मी पूजन को विशेष महत्व दिया गया है।

हालांकि, पूजा और निशिता काल का सटीक समय स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना उचित रहेगा।

इस रात चंद्रमा को अर्घ्य देने और माता लक्ष्मी की पूजा करने की भी परंपरा है।

शरद पूर्णिमा की व्रत कथा

शरद पूर्णिमा से जुड़ी एक प्रचलित कथा दो बहनों से संबंधित है।

कथा के अनुसार, एक साहूकार की दो पुत्रियां थीं। दोनों बहनें पूर्णिमा का व्रत रखती थीं। बड़ी बहन व्रत को पूरी श्रद्धा और नियम के साथ पूरा करती थी, जबकि छोटी बहन व्रत को अधूरा छोड़ देती थी।

धार्मिक कथा के अनुसार, छोटी बहन के जीवन में कई परेशानियां आने लगीं। बाद में उसे व्रत को विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूरा करने की सलाह दी गई। उसने शरद पूर्णिमा का व्रत पूरी निष्ठा से किया और माता लक्ष्मी की पूजा एवं रात्रि जागरण किया।

इसके बाद उसके जीवन में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है। इसी कारण शरद पूर्णिमा पर श्रद्धा के साथ व्रत, पूजा और जागरण करने की परंपरा आज भी कई परिवारों में निभाई जाती है।

यह कथा धार्मिक और लोक-परंपरा से जुड़ी मान्यता है।

शरद पूर्णिमा पर क्या करें?

शरद पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार कई धार्मिक कार्य करते हैं।

रात्रि जागरण करें

कोजागरी पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए जागरण करने की परंपरा है। ‘कोजागरी’ शब्द का संबंध इस मान्यता से है कि माता लक्ष्मी पूछती हैं कि कौन जाग रहा है।

माता लक्ष्मी की पूजा करें

रात में साफ स्थान पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर रखकर दीपक जलाएं और श्रद्धा के साथ पूजा करें।

दान-पुण्य करें

सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, चावल, दूध या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है।

सात्विक भोजन करें

इस दिन सात्विक भोजन करने और मन को शांत रखने की परंपरा है। पूजा के दौरान सकारात्मक विचार रखें और किसी का अपमान या अनादर करने से बचें।

शरद पूर्णिमा पर क्या न करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है:

  • मांसाहार और नशीले पदार्थों से दूर रहें।
  • किसी व्यक्ति का अपमान या अनादर न करें।
  • घर में अनावश्यक विवाद और क्रोध से बचें।
  • पूजा के दौरान साफ-सफाई और सात्विकता का ध्यान रखें।
  • किसी भी धार्मिक उपाय को अंधविश्वास के रूप में लेने के बजाय अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार करें।

शरद पूर्णिमा पर कौन से मंत्र जपें?

माता लक्ष्मी की पूजा के दौरान श्रद्धालु लक्ष्मी मंत्र का जाप कर सकते हैं।

माता लक्ष्मी मंत्र:

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

चंद्रदेव मंत्र:

ॐ सों सोमाय नमः।

मंत्र जाप करते समय मन को शांत रखें और श्रद्धा के साथ पूजा करें।

शरद पूर्णिमा की रात खीर क्यों रखी जाती है?

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Image Credit: Gemini

शरद पूर्णिमा की सबसे प्रसिद्ध परंपराओं में से एक है रात में खीर बनाकर उसे चांदनी में रखना।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी को विशेष और शीतल माना जाता है। इसी कारण दूध और चावल से बनी खीर को रात में खुले आसमान के नीचे रखा जाता है और अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

कुछ परिवार खीर को महीन कपड़े या जाली से ढककर रखते हैं, ताकि धूल या कीड़े उसमें न जाएं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि चांदनी में रखी खीर के अमृत या औषधि बनने का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे मुख्य रूप से धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए।

शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

शरद पूर्णिमा को माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की उपासना से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागरण करने वाले भक्तों पर अपनी कृपा करती हैं।

इसी वजह से कई घरों में रात को दीपक जलाकर लक्ष्मी पूजा, मंत्र जाप और जागरण किया जाता है।

यह पर्व लोगों को श्रद्धा, संयम, दान और सकारात्मक सोच का संदेश भी देता है।

शरद पूर्णिमा 2026 में कब है?

उत्तर: शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी।

शरद पूर्णिमा की पूर्णिमा तिथि कब शुरू होगी?

उत्तर: पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:55 बजे शुरू होगी।

पूर्णिमा तिथि कब समाप्त होगी?

उत्तर: पूर्णिमा तिथि 26 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी।

शरद पूर्णिमा की रात खीर क्यों रखी जाती है?

उत्तर: धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की चांदनी को विशेष माना जाता है। इसी कारण खीर को रात में चांदनी में रखने और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है।

क्या शरद पूर्णिमा की खीर वैज्ञानिक रूप से अमृत बन जाती है?

उत्तर: ऐसा मानना धार्मिक आस्था से जुड़ा है। खीर के अमृत या औषधि बनने का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

कोजागरी पूर्णिमा का क्या अर्थ है?

उत्तर: कोजागरी नाम ‘को जागर्ति’ से जुड़ा माना जाता है, जिसका अर्थ है—कौन जाग रहा है? धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात माता लक्ष्मी जागरण करने वाले भक्तों पर कृपा करती हैं।

निष्कर्ष

शरद पूर्णिमा 2026 का पर्व 25 अक्टूबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा, व्रत, दान और रात्रि जागरण की परंपरा है। रात में खीर को चांदनी में रखने की परंपरा भी इसी पर्व की खास पहचान है।

शरद पूर्णिमा केवल पूजा-पाठ का अवसर ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम, दान और सकारात्मक सोच का पर्व भी है। अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपरा के अनुसार इस दिन पूजा करें और पर्व का आनंद लें।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। पूजा-विधि और समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित की सलाह लें।

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