✨ Welcome to DivineWorld | Wisdom • Vastu • Rashifal • Spiritual Knowledge 🙏
: दिवाली पर घर के मुख्य द्वार से अंदर की ओर बने मां लक्ष्मी के लाल चरण चिह्न

दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न कहां लगाने चाहिए? जानें सही दिशा, नियम और धार्मिक महत्व

By Deepak Kumar
Published: शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 at 5:00 PM

दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस अवसर पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं और मुख्य द्वार को फूलों, तोरण तथा रंगोली से सजाते हैं। इसी परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाना।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी के चरण चिह्न घर में सुख, समृद्धि और शुभता के स्वागत का प्रतीक माने जाते हैं। दिवाली के समय कई परिवार इन्हें मुख्य द्वार से लेकर पूजा स्थल तक बनाते हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इन्हें लगाने की परंपरा अलग हो सकती है।

अगर आप भी इस दिवाली अपने घर में मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाने की तैयारी कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि इन्हें कहां लगाना शुभ माना जाता है, किस दिशा का ध्यान रखना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए।

दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न कहां लगाने चाहिए?

मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाने के लिए घर का मुख्य द्वार सबसे प्रचलित स्थानों में से एक है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, मुख्य द्वार घर में प्रवेश का स्थान होने के कारण शुभता और समृद्धि के स्वागत का प्रतीक माना जाता है।

आप अपनी सुविधा और घर की बनावट के अनुसार निम्नलिखित स्थानों पर चरण चिह्न बना सकते हैं।

मुख्य द्वार के पास

दिवाली पर घर के मुख्य प्रवेश द्वार के पास मां लक्ष्मी के छोटे-छोटे चरण चिह्न बनाए जा सकते हैं। इन्हें दरवाजे के दोनों ओर या प्रवेश मार्ग के साफ हिस्से में सजाया जा सकता है।

ध्यान रखें कि चरण चिह्न ऐसे स्थान पर हों, जहां लोगों के पैरों से वे बार-बार खराब न हों और आने-जाने में परेशानी भी न हो।

मुख्य द्वार से घर के अंदर की ओर

कई घरों में मुख्य द्वार से पूजा स्थल की तरफ जाते हुए मां लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाने की परंपरा है। इन्हें इस तरह बनाया जाता है कि वे घर के अंदर प्रवेश करती हुई प्रतीत हों।

यह परंपरा मां लक्ष्मी के घर में आगमन और उनका स्वागत करने की भावना को दर्शाती है। इसे धार्मिक प्रतीक के रूप में देखें, किसी निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं।

पूजा घर या मंदिर के पास

अगर आपके घर में पूजा के लिए अलग स्थान है, तो वहां मां लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति के पास सजावटी चरण चिह्न बनाए जा सकते हैं। इससे पूजा स्थल की सजावट अधिक पारंपरिक और सुंदर दिखाई देती है।

चरण चिह्न बनाते समय पूजा की जगह साफ रखें और उन्हें सीधे ऐसी जगह न बनाएं जहां पूजा सामग्री रखने या बैठने में परेशानी हो।

मां लक्ष्मी के चरण चिह्न किस दिशा में लगाने चाहिए?

दिवाली पर चरण चिह्नों की दिशा को लेकर अलग-अलग धार्मिक और वास्तु मान्यताएं प्रचलित हैं। सामान्य रूप से कई परिवार मुख्य द्वार से घर के अंदर की ओर आते हुए चरण चिह्न बनाते हैं। इसका प्रतीकात्मक अर्थ मां लक्ष्मी का घर में स्वागत करना माना जाता है।

दिशा के संबंध में इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:

  • मुख्य द्वार: चरण चिह्नों को प्रवेश द्वार से घर के अंदर की ओर आते हुए बनाना एक प्रचलित परंपरा है।
  • पूजा स्थल: चरण चिह्नों को पूजा घर की सजावट के अनुरूप रखें और मां लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति के पास पर्याप्त जगह छोड़ें।
  • उत्तर और पूर्व दिशा: कुछ वास्तु मान्यताओं में इन दिशाओं को शुभ माना जाता है। आप घर की बनावट के अनुसार इनका ध्यान रख सकते हैं।

यह समझना जरूरी है कि चरण चिह्नों की दिशा के लिए सभी परिवारों और परंपराओं में एक जैसा नियम नहीं है। इसलिए किसी एक दिशा को अनिवार्य बताना उचित नहीं होगा।

मां लक्ष्मी के चरण चिह्न किस रंग से बनाने चाहिए?

दिवाली की सजावट में रंगों का विशेष महत्व होता है। मां लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाने के लिए लाल, कुमकुम, रोली और हल्दी जैसे पारंपरिक रंगों का उपयोग किया जाता है। कुछ लोग सफेद रंगोली या फूलों की पंखुड़ियों से भी इन्हें बनाते हैं।

आप इन विकल्पों को चुन सकते हैं:

  • लाल रंग: पारंपरिक पूजा और शुभता से जुड़ा रंग माना जाता है।
  • कुमकुम या रोली: पूजा से संबंधित सजावट में इनका उपयोग किया जाता है।
  • सफेद रंगोली: साफ-सुथरी और सुंदर सजावट के लिए अच्छा विकल्प है।
  • फूलों की पंखुड़ियां: प्राकृतिक और आकर्षक सजावट के लिए इनका उपयोग कर सकते हैं।

यदि घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हैं, तो रंगों का इस्तेमाल सावधानी से करें। ऐसी सामग्री चुनें जो फर्श को नुकसान न पहुंचाए और आसानी से साफ हो सके।

दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाने की विधि

diwali lakshmi footprints making ritual
Image Credit: Gemini

चरण चिह्न लगाने से पहले घर की सफाई और पूजा की तैयारी करना अच्छा रहता है। आप इस सरल विधि का पालन कर सकते हैं।

पहला चरण: स्थान की सफाई करें

मुख्य द्वार और पूजा स्थल के आसपास की जगह अच्छी तरह साफ कर लें। जरूरत हो तो फर्श को पोंछकर सूखने दें।

दूसरा चरण: सजावट की तैयारी करें

रंगोली, कुमकुम, रोली या अपनी पसंद की उपयुक्त सामग्री तैयार रखें। यदि बाजार से बने चरण चिह्न खरीद रहे हैं, तो उन्हें लगाने से पहले सतह साफ कर लें।

तीसरा चरण: चरण चिह्न बनाएं

मुख्य द्वार के पास से घर के अंदर की ओर जाते हुए छोटे-छोटे चरण चिह्न बनाएं। उन्हें एक सीधी पंक्ति में या घर की सजावट के अनुसार सुंदर ढंग से बनाया जा सकता है।

चौथा चरण: पूजा स्थल सजाएं

पूजा घर के आसपास दीपक, फूल और अन्य पूजा सामग्री व्यवस्थित रखें। चरण चिह्नों को पूजा स्थल के पास इस तरह बनाएं कि पूजा के समय पर्याप्त जगह उपलब्ध रहे।

पांचवां चरण: श्रद्धा से पूजा करें

दिवाली पर अपने परिवार की परंपरा के अनुसार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करें। पूजा में स्वच्छता, श्रद्धा और परिवार की सहभागिता पर ध्यान दें।

क्या मां लक्ष्मी के चरण चिह्न घर के बाहर लगाने चाहिए या अंदर?

यह सवाल बहुत से लोगों के मन में आता है। इसका उत्तर आपके घर की बनावट और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।

मुख्य द्वार के बाहर चरण चिह्न बनाने से प्रवेश स्थान की सजावट सुंदर लग सकती है। वहीं, मुख्य द्वार से अंदर की ओर चरण चिह्न बनाना मां लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक माना जाता है।

यदि आपके घर के बाहर खुली जगह नहीं है या वहां बारिश और धूल से सजावट खराब हो सकती है, तो आप इन्हें दरवाजे के अंदर की ओर बना सकते हैं। अपार्टमेंट में रहने वाले लोग दरवाजे के पास छोटी रंगोली या हटाए जा सकने वाले सजावटी स्टिकर का उपयोग भी कर सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सजावट घर के सभी सदस्यों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित हो।

मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाते समय किन गलतियों से बचें?

चरण चिह्न लगाते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • गंदे या गीले फर्श पर चरण चिह्न न बनाएं।
  • दरवाजे के ठीक बीच में ऐसे चिह्न न बनाएं, जिनसे लोगों को चलने में परेशानी हो।
  • फिसलन पैदा करने वाले रंगों या सजावटी सामग्री का इस्तेमाल न करें।
  • पूजा स्थल के आसपास जरूरत से ज्यादा सजावट करके जगह न घेरें।
  • चरण चिह्नों की दिशा को लेकर डर या भ्रम में न रहें।
  • सजावट को समृद्धि की गारंटी मानने के बजाय इसे श्रद्धा और स्वागत का प्रतीक समझें।

घर में सुखद वातावरण बनाए रखने के लिए साफ-सफाई, आपसी सम्मान और जिम्मेदारी से काम लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

क्या दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाने से धन बढ़ता है?

धार्मिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। इसी कारण दिवाली पर उनके चरण चिह्न लगाने को शुभता के स्वागत से जोड़ा जाता है।

हालांकि, केवल चरण चिह्न लगाने से धन बढ़ने या आर्थिक समस्याएं समाप्त होने की कोई निश्चित गारंटी नहीं है। आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए बचत, सोच-समझकर खर्च करना, नियमित मेहनत और सही वित्तीय निर्णय भी जरूरी हैं।

धार्मिक परंपराओं का उद्देश्य श्रद्धा, सकारात्मकता और परिवार में अच्छे संस्कारों को बढ़ावा देना भी है। इसलिए दिवाली पर चरण चिह्न बनाते समय आस्था के साथ व्यावहारिक जीवन पर भी ध्यान दें।

दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्नों का धार्मिक महत्व

हिंदू परंपरा में मां लक्ष्मी को समृद्धि, सौभाग्य और सुख-शांति से जोड़ा जाता है। दिवाली पर उनकी पूजा करके लोग अपने परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

मां लक्ष्मी के चरण चिह्न उनके आगमन और स्वागत का प्रतीक माने जाते हैं। मुख्य द्वार से पूजा स्थल तक इन्हें बनाने की परंपरा इसी भावना को व्यक्त करती है कि परिवार अपने घर में शुभ अवसर का स्वागत कर रहा है।

इन प्रतीकों के साथ दिवाली का वास्तविक संदेश भी याद रखना चाहिए—घर और मन की स्वच्छता, परिवार के साथ समय बिताना, जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखना।

निष्कर्ष

दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न मुख्य द्वार के पास, प्रवेश मार्ग से घर के अंदर की ओर और पूजा स्थल के आसपास लगाए जा सकते हैं। लाल रंग, कुमकुम, रोली, सफेद रंगोली या फूलों से इन्हें सुंदर बनाया जा सकता है।

दिशा और स्थान चुनते समय अपने घर की बनावट, सुरक्षा और पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखें। अलग-अलग क्षेत्रों में मान्यताएं अलग हो सकती हैं, इसलिए किसी एक नियम को सभी के लिए अनिवार्य न समझें।

इस दिवाली अपने घर को स्वच्छ रखें, श्रद्धा से पूजा करें और परिवार के साथ खुशियां बांटें। यही त्योहार की भावना को सुंदर बनाता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और सामान्य प्रचलनों पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि और मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं। इन्हें निश्चित परिणामों या आर्थिक लाभ की गारंटी के रूप में न लें।

इस आर्टिकल को शेयर करें