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दिवाली पर मुख्य दरवाजे को रंगोली, दीपक, फूलों के तोरण और कलश से सजाया गया

दीपावली पर घर के मुख्य दरवाजे पर रखें ये 7 शुभ चीजें, जानें माता लक्ष्मी के स्वागत की परंपरा और महत्व

By Deepak Kumar
Published: शनिवार, 7 नवंबर 2026 at 1:54 PM

दीपावली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और खुशियों से भरे त्योहारों में से एक है। इस दिन हर घर में साफ-सफाई, सजावट, दीप जलाने और माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा की विशेष तैयारी की जाती है। मान्यता है कि दीपावली की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, सुंदर तथा प्रकाश से भरे घरों में उनका स्वागत किया जाता है। इसी कारण दीपावली से पहले लोग अपने घर के हर कोने की सफाई करते हैं और मुख्य दरवाजे को विशेष रूप से सजाते हैं।

घर का मुख्य दरवाजा केवल आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यह घर का सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश स्थान भी है। भारतीय परंपरा में प्रवेश द्वार को अतिथि सत्कार, मंगल और नई शुरुआत का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि दीपावली के दिन लोग मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाते हैं, फूलों के तोरण लगाते हैं और मिट्टी के दीपक जलाते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीपावली पर मुख्य दरवाजे के पास रखी जाने वाली कुछ पारंपरिक चीजों का अपना अलग धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है?

अगर आप भी इस दीपावली अपने घर को सुंदर तरीके से सजाना चाहते हैं, तो यहां जानिए घर के मुख्य दरवाजे पर रखी या लगाई जाने वाली 7 शुभ चीजें, उनका धार्मिक महत्व और उन्हें सजाने का सही तरीका।

diwali main door lakshmi decoration
Image Credit: Gemini

1. मुख्य दरवाजे पर बनाएं सुंदर रंगोली

दीपावली के दिन घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाना बहुत पुरानी और लोकप्रिय परंपरा है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में रंगोली को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। कहीं इसे अल्पना कहा जाता है, तो कहीं कोलम और मांडना के नाम से जाना जाता है।

धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं में रंगोली को शुभ अवसर, खुशहाली और अतिथि स्वागत का प्रतीक माना जाता है। दीपावली पर घर के प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाने का उद्देश्य घर को सुंदर बनाना और त्योहार के उत्साह को प्रदर्शित करना भी है।

रंगोली कैसे बनाएं?

  • मुख्य दरवाजे के सामने सबसे पहले अच्छी तरह सफाई करें।
  • रंगोली बनाने के लिए प्राकृतिक रंगों या फूलों की पंखुड़ियों का इस्तेमाल करें।
  • कमल का फूल, दीपक, स्वास्तिक और पारंपरिक ज्यामितीय डिजाइन बना सकते हैं।
  • रंगोली के बीच में छोटे मिट्टी के दीपक रखकर इसे और आकर्षक बना सकते हैं।
  • रंगोली ऐसी जगह बनाएं जहां लोगों के आने-जाने में परेशानी न हो।

विशेष सुझाव: अगर आपके पास ज्यादा समय नहीं है, तो गेंदे के फूलों और चावल के आटे से भी छोटी और सुंदर रंगोली बना सकते हैं।

2. मुख्य दरवाजे पर लगाएं आम या अशोक के पत्तों का तोरण

दीपावली के अवसर पर घर के मुख्य दरवाजे पर तोरण लगाना शुभ परंपरा मानी जाती है। पुराने समय से ही भारतीय घरों में त्योहारों और मांगलिक अवसरों पर दरवाजे को आम के पत्तों और फूलों से सजाया जाता रहा है।

आम और अशोक के पत्तों का तोरण घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक सजावट का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। आम के पत्तों को कई धार्मिक अनुष्ठानों में मंगल और पवित्रता से जोड़कर देखा जाता है।

तोरण लगाने का सही तरीका:

  • ताजे और साफ आम या अशोक के पत्ते लें।
  • उन्हें धागे में पिरोकर सुंदर तोरण तैयार करें।
  • चाहें तो इसके साथ गेंदे के फूल भी जोड़ सकते हैं।
  • तोरण को मुख्य दरवाजे के ऊपरी हिस्से पर लगाएं।
  • पत्तों के सूखने पर उन्हें बदल दें।

आजकल बाजार में कपड़े, फूलों और मोतियों से बने सजावटी तोरण भी मिलते हैं। अगर ताजे पत्ते उपलब्ध नहीं हैं, तो आप इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

ध्यान रखें: तोरण इतना नीचे न लगाएं कि दरवाजा खोलने या बंद करने में परेशानी हो।

3. मुख्य दरवाजे पर बनाएं स्वास्तिक का शुभ चिह्न

हिंदू धर्म में स्वास्तिक को शुभता, मंगल और कल्याण का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ, गृह प्रवेश, विवाह और दूसरे मांगलिक अवसरों पर स्वास्तिक बनाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

दीपावली पर भी कई परिवार अपने घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर या प्रवेश द्वार के पास स्वास्तिक बनाते हैं। इसे धार्मिक श्रद्धा और शुभ शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है।

स्वास्तिक कैसे बनाएं?

  1. सबसे पहले दरवाजे के आसपास की जगह साफ करें।
  2. रोली, कुमकुम या हल्दी का इस्तेमाल करें।
  3. मुख्य दरवाजे के दोनों ओर छोटे और सुंदर स्वास्तिक बना सकते हैं।
  4. इसके पास शुभ-लाभ भी लिख सकते हैं।
  5. चाहें तो स्वास्तिक के आसपास फूलों की छोटी सजावट करें।

कुछ परिवार स्वास्तिक के साथ भगवान गणेश का नाम भी लिखते हैं। मान्यता के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से करना मंगलकारी माना जाता है।

विशेष बात: स्वास्तिक बनाते समय साफ-सफाई और श्रद्धा का ध्यान रखें। सजावट के लिए ऐसा रंग इस्तेमाल करें जिसे बाद में आसानी से साफ किया जा सके।

4. घर के मुख्य दरवाजे के पास जलाएं मिट्टी के दीपक

दीपावली का त्योहार दीपों के बिना अधूरा माना जाता है। इस दिन मिट्टी के दीपक जलाना सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है।

दीपक प्रकाश, ज्ञान और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात घर के प्रवेश द्वार पर दीपक जलाकर माता लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।

मिट्टी के दीपक इस्तेमाल करने की परंपरा का एक सांस्कृतिक महत्व भी है। यह स्थानीय कारीगरों और कुम्हारों की मेहनत को सम्मान देने का अच्छा अवसर होता है।

मुख्य दरवाजे पर दीपक कैसे सजाएं?

  • प्रवेश द्वार के दोनों ओर मिट्टी के दीपक रख सकते हैं।
  • दीपक में शुद्ध घी या अपनी परंपरा के अनुसार तेल डालें।
  • दीपक को साफ और समतल स्थान पर रखें।
  • दरवाजे के आसपास छोटी दीपों की कतार बनाकर सजावट कर सकते हैं।
  • पूजा के बाद भी दीपक की सुरक्षा का ध्यान रखें।

सावधानी: दीपक को पर्दे, लकड़ी के दरवाजे, सूखे फूलों और ज्वलनशील सजावट से दूर रखें। बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से भी सुरक्षित रखें। दीपक को जलता हुआ कभी अकेला न छोड़ें।

5. मुख्य दरवाजे को गेंदे और ताजे फूलों से सजाएं

भारतीय त्योहारों में फूलों का विशेष महत्व होता है। पूजा-पाठ से लेकर घर की सजावट तक फूलों का इस्तेमाल किया जाता है। दीपावली पर खासतौर पर गेंदे के फूलों की सजावट बहुत सुंदर लगती है।

गेंदे के पीले और नारंगी रंग को उत्साह, खुशियों और उत्सव से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से दीपावली के समय बाजारों में गेंदे के फूलों की मालाएं और सजावटी तोरण खूब दिखाई देते हैं।

फूलों से मुख्य दरवाजा कैसे सजाएं?

  • दरवाजे के ऊपर गेंदे के फूलों की माला लगाएं।
  • दरवाजे के दोनों तरफ फूलों की छोटी लड़ियां लगाई जा सकती हैं।
  • सफेद और पीले फूलों का संयोजन भी सुंदर दिखाई देता है।
  • फूलों के साथ छोटी सजावटी लाइटों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • प्रवेश द्वार के पास फूलों से सजी छोटी टोकरी भी रख सकते हैं।

एक खास सुझाव: अगर आप पारंपरिक लुक चाहते हैं, तो गेंदे के फूलों के साथ आम के पत्तों का तोरण लगाएं। इससे घर का प्रवेश द्वार बहुत आकर्षक दिखाई देगा।

6. प्रवेश द्वार के पास रखें पूजा का कलश

हिंदू धर्म में कलश को मंगल, पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ, विवाह, गृह प्रवेश और कई दूसरे शुभ अवसरों पर कलश स्थापना की परंपरा है।

दीपावली के अवसर पर भी पूजा की सजावट में कलश का विशेष स्थान होता है। कई परिवार घर के पूजा स्थल पर कलश स्थापित करते हैं और कुछ लोग प्रवेश द्वार के पास भी कलश से पारंपरिक सजावट करते हैं।

कलश की सजावट कैसे करें?

  • सबसे पहले एक साफ और सुंदर कलश लें।
  • उसमें स्वच्छ जल भरें।
  • अपनी पारिवारिक पूजा परंपरा के अनुसार आम के पत्ते और नारियल रखें।
  • कलश के बाहर रोली या कुमकुम से स्वास्तिक बना सकते हैं।
  • इसके आसपास फूलों और दीपक से सजावट करें।

ध्यान रखें कि कलश को किसी स्थिर और सुरक्षित जगह पर रखें, ताकि वह गिरकर टूटे नहीं। यदि दरवाजे के पास पर्याप्त जगह नहीं है, तो इसे पूजा स्थल पर रखना बेहतर रहेगा।

धार्मिक महत्व: कलश को शुभता और मंगल कार्यों की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। इसे पूजा में शामिल करना भारतीय धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

7. घर के प्रवेश द्वार पर बनाएं माता लक्ष्मी के चरण चिह्न

दीपावली पर माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए उनके चरण चिह्न बनाने की परंपरा बहुत प्रचलित है। कई घरों में मुख्य दरवाजे से लेकर पूजा स्थल तक छोटे-छोटे पैरों के निशान बनाए जाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता लक्ष्मी के चरण चिह्न घर में उनके आगमन, सुख-समृद्धि और मंगल का प्रतीक माने जाते हैं।

इस परंपरा के पीछे श्रद्धा और भक्ति की भावना जुड़ी हुई है। दीपावली के अवसर पर लोग अपने घर में माता लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए इस तरह की सजावट करते हैं।

लक्ष्मी जी के चरण चिह्न कैसे बनाएं?

  • सबसे पहले मुख्य दरवाजे के पास जगह साफ करें।
  • लाल रंग, रोली या रंगोली के रंग से छोटे पैरों के निशान बनाएं।
  • निशानों को मुख्य दरवाजे से घर के अंदर की ओर बनाएं।
  • चाहें तो चरण चिह्नों के आसपास छोटे फूल और दीपक रखें।
  • पूजा स्थल के पास भी इसी तरह के छोटे चरण चिह्न बना सकते हैं।

विशेष बात: चरण चिह्न बनाते समय उन्हें सजावट का हिस्सा मानकर श्रद्धा के साथ बनाएं। अलग-अलग क्षेत्रों में इनके आकार और दिशा की परंपराएं अलग हो सकती हैं।

दीपावली पर मुख्य दरवाजे की सजावट के लिए कुछ खास वास्तु और सफाई से जुड़े सुझाव

दीपावली पर मुख्य दरवाजे को सजाने के साथ-साथ उसकी साफ-सफाई पर भी ध्यान देना जरूरी है। सुंदर सजावट तभी अच्छी लगती है जब प्रवेश द्वार व्यवस्थित और साफ हो।

इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपने घर के प्रवेश द्वार को और आकर्षक बना सकते हैं।

1. मुख्य दरवाजे को अच्छी तरह साफ रखें

दीपावली से पहले मुख्य दरवाजे, उसके आसपास की दीवारों और फर्श की अच्छी तरह सफाई करें। दरवाजे पर जमी धूल और गंदगी को साफ करें। जरूरत हो तो दरवाजे पर पॉलिश या पेंट भी करवा सकते हैं।

2. दरवाजे के सामने जूते-चप्पल इकट्ठा न करें

घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर जूते-चप्पल बिखरे हुए अच्छे नहीं लगते। इन्हें एक व्यवस्थित जूता स्टैंड में रखें और प्रवेश द्वार को खुला तथा साफ रखें।

3. पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करें

दीपावली प्रकाश का पर्व है। इसलिए मुख्य दरवाजे पर सुंदर लाइटों और सुरक्षित सजावटी बल्बों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे घर का प्रवेश द्वार रात में भी सुंदर दिखाई देता है।

4. दरवाजे के आसपास कूड़ा न रखें

दीपावली पर घर के अंदर और बाहर दोनों जगह सफाई का ध्यान रखें। मुख्य दरवाजे के पास कूड़ेदान या गंदगी जमा न होने दें।

5. सजावट में जरूरत से ज्यादा सामान न लगाएं

कई बार ज्यादा सजावट करने से दरवाजा खोलने-बंद करने में परेशानी होती है। इसलिए सजावट ऐसी रखें जिससे घर का प्रवेश द्वार सुंदर भी दिखे और आने-जाने का रास्ता भी खुला रहे।

दीपावली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का महत्व

दीपावली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की विशेष परंपरा है। माता लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का आरंभ करने वाला देवता माना जाता है।

इस दिन शाम के समय शुभ मुहूर्त में परिवार के सदस्य एक साथ पूजा करते हैं। पूजा में दीपक, फूल, मिठाई, फल, धूप और अन्य पूजन सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।

माता लक्ष्मी की पूजा के साथ भगवान गणेश का पूजन भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे परिवार में सुख, शांति और मंगल की कामना की जाती है।

दीपावली पर घर के मुख्य दरवाजे को सजाना और पूजा स्थल को साफ रखना इसी धार्मिक उत्सव की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

1. दीपावली के दिन घर के मुख्य दरवाजे पर क्या रखना चाहिए?

दीपावली पर मुख्य दरवाजे के पास रंगोली, मिट्टी के दीपक, फूलों की सजावट और माता लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाए जा सकते हैं। आम या अशोक के पत्तों का तोरण भी लगाया जाता है।

2. दीपावली पर मुख्य दरवाजे पर कौन-सा तोरण लगाना शुभ माना जाता है?

धार्मिक परंपराओं में आम और अशोक के पत्तों से बने तोरण को शुभ माना जाता है। गेंदे के फूलों से बना तोरण भी घर की सजावट के लिए लोकप्रिय है।

3. दीपावली पर लक्ष्मी जी के चरण किस दिशा में बनाने चाहिए?

कई परिवारों में माता लक्ष्मी के चरण चिह्न मुख्य दरवाजे से घर के अंदर की ओर बनाए जाते हैं। इसे माता लक्ष्मी के घर में आगमन का प्रतीक माना जाता है।

4. क्या दीपावली पर मुख्य दरवाजे के दोनों ओर दीपक जलाना चाहिए?

दीपावली पर घर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर दीपक जलाने की परंपरा है। हालांकि दीपक सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए और आग से जुड़ी सावधानियों का पालन करना चाहिए।

5. दीपावली पर मुख्य दरवाजे की सफाई क्यों जरूरी मानी जाती है?

धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं में स्वच्छता को शुभता से जोड़ा जाता है। इसलिए दीपावली पर घर के प्रवेश द्वार और पूजा स्थल की विशेष सफाई की जाती है।

निष्कर्ष

दीपावली केवल दीप जलाने और घर सजाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह परिवार, प्रेम, परंपरा और खुशियों को एक साथ मनाने का अवसर भी है। इस दिन घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाना, आम के पत्तों का तोरण लगाना, स्वास्तिक बनाना, मिट्टी के दीपक जलाना और माता लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाना हमारी सुंदर सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा है।

आप भी इस दीपावली इन 7 शुभ चीजों से अपने घर के प्रवेश द्वार को सजा सकते हैं। जरूरी नहीं कि सभी चीजें एक साथ इस्तेमाल की जाएं। अपनी सुविधा, जगह और पारिवारिक परंपरा के अनुसार सजावट करें।

इस दीपावली अपने घर को रोशनी से सजाएं, अपनों के साथ खुशियां बांटें और जरूरतमंद लोगों की सहायता करके त्योहार की खुशी को और खास बनाएं।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी हिंदू धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा तथा सजावट के तरीके अलग हो सकते हैं। किसी भी वस्तु को रखने से धन या सौभाग्य मिलने की गारंटी नहीं है।

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