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नरक चतुर्दशी और छोटी दीपावली पर भगवान श्रीकृष्ण एवं दीपदान

नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और इसका महत्व

By Deepak Kumar
Published: शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 at 4:44 PM

दीपावली का त्योहार केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाला खुशियों, रोशनी और धार्मिक परंपराओं का पर्व है। इसी पर्व का एक महत्वपूर्ण दिन है नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली, रूप चौदस और नरक चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं, भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया जाता है और सुबह विशेष रूप से अभ्यंग स्नान करने की परंपरा निभाई जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी का दिन बुराई पर अच्छाई की जीत और जीवन से नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक है। इस दिन यमराज के नाम से दीपदान करने की भी परंपरा है। आइए जानते हैं नरक चतुर्दशी 2026 कब है, अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त क्या है, पूजा कैसे करें और इससे जुड़ी पौराणिक कथा क्या है।

नरक चतुर्दशी 2026 कब है? (Narak Chaturdashi 2026 Date)

हिंदू पंचांग के अनुसार, नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर, रविवार को किया जाएगा। वहीं, 7 नवंबर की शाम को काली चौदस और छोटी दिवाली के अवसर पर दीपदान की परंपरा निभाई जाएगी।

इस वर्ष चतुर्दशी तिथि दो कैलेंडर दिनों में रहने के कारण छोटी दिवाली के दीपदान और नरक चतुर्दशी के अभ्यंग स्नान की तारीखों में अंतर दिखाई देता है। इसलिए दोनों परंपराओं को समझना जरूरी है।

नरक चतुर्दशी 2026 की प्रमुख तिथियां:

  • काली चौदस और छोटी दिवाली का दीपदान: 7 नवंबर 2026, शनिवार की शाम
  • नरक चतुर्दशी और अभ्यंग स्नान: 8 नवंबर 2026, रविवार
  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
  • दीपावली और लक्ष्मी पूजा: 8 नवंबर 2026, रविवार

ध्यान दें कि धार्मिक अनुष्ठान के लिए तिथि और मुहूर्त का निर्धारण स्थानीय पंचांग तथा परंपरा के अनुसार किया जाता है।

नरक चतुर्दशी 2026 शुभ मुहूर्त (Abhyang Snan Muhurat)

नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करना विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। इस स्नान में शरीर पर तिल के तेल से मालिश करके उबटन लगाया जाता है और फिर स्नान किया जाता है।

नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले करना शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर तिल के तेल से मालिश करने के बाद स्नान करने की परंपरा है।

अभ्यंग स्नान का शुभ समय:

  • दिन: रविवार
  • तारीख: 8 नवंबर 2026
  • शुभ मुहूर्त: सुबह 5:03 से 6:01 बजे तक

ध्यान दें कि अभ्यंग स्नान का शुभ समय अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग में दिए गए मुहूर्त के अनुसार स्नान करें।

नरक चतुर्दशी का धार्मिक महत्व

नरक चतुर्दशी को बुराई, अज्ञान और नकारात्मकता पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक अत्याचारी राक्षस का वध करके उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाई थी।

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने, घर की साफ-सफाई करने और दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति को शुद्धता, आरोग्य और सकारात्मकता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

नरक चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन शरीर की स्वच्छता और सुंदरता का विशेष ध्यान रखा जाता है। महिलाएं और पुरुष पारंपरिक रूप से उबटन लगाकर स्नान करते हैं।

इस पर्व का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि हमें अपने जीवन से बुरे विचारों, अहंकार और नकारात्मकता को दूर करके अच्छे कार्यों की ओर आगे बढ़ना चाहिए।

नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा (Narak Chaturdashi Katha)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसने अपनी शक्ति और अहंकार के कारण देवताओं तथा सामान्य लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया था। उसके अत्याचार लगातार बढ़ते जा रहे थे।

कहा जाता है कि नरकासुर ने अनेक राजाओं को पराजित किया और हजारों स्त्रियों को बंदी बना लिया था। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी।

देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का अंत करने का निर्णय लिया। इस युद्ध में उनकी पत्नी सत्यभामा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंततः भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके बंदी बनाई गई स्त्रियों को मुक्त कराया और संसार को उसके अत्याचारों से छुटकारा दिलाया।

मान्यता है कि नरकासुर के वध के बाद लोगों ने खुशी में दीपक जलाकर उत्सव मनाया। इसी विजय की याद में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाने लगा।

यह कथा हमें सिखाती है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में सत्य और धर्म की ही विजय होती है।

नरक चतुर्दशी की पूजा विधि (Narak Chaturdashi Puja Vidhi)

narak chaturdashi puja vidhi
Image Credit: Gemini

नरक चतुर्दशी के दिन पूजा-पाठ के साथ स्वच्छता और दीपदान का विशेष महत्व होता है। इस दिन कुछ सरल धार्मिक परंपराओं का पालन करके भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की जाती है।

1. सुबह जल्दी उठकर अभ्यंग स्नान करें

नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तिल के तेल से मालिश करने और उबटन लगाने की परंपरा है। इसके बाद स्नान करें। इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है।

2. भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें

स्नान के बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा स्थल की सफाई करें और भगवान श्रीकृष्ण के सामने दीपक जलाकर उनका स्मरण करें। उन्हें फूल और फल अर्पित करें।

3. भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें

भगवान को धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। नरकासुर के वध की कथा का स्मरण करें और परिवार की सुख-शांति तथा कल्याण की प्रार्थना करें।

4. यमराज के नाम से दीपदान करें

छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी के अवसर पर यम दीपदान की विशेष परंपरा है। शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर यमराज के नाम से सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे परिवार की सुरक्षा और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।

5. घर में दीपक जलाएं

शाम को घर के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। इससे घर में दीपावली जैसा उत्साह और प्रकाश फैलता है।

नरक चतुर्दशी पर यम दीपदान का महत्व

नरक चतुर्दशी पर यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा को यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन यमराज के लिए दीपदान करने से परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और सुरक्षा की कामना की जाती है।

परंपरा के अनुसार, मिट्टी के दीपक में सरसों का तेल डालकर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखा जाता है। दीपक जलाते समय यमराज से परिवार की रक्षा और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य जीवन के प्रति सम्मान, परिवार की मंगलकामना और मृत्यु के भय से मुक्ति की प्रार्थना करना है।

नरक चतुर्दशी पूजा सामग्री

इस दिन पूजा करने के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। घर में उपलब्ध सामान्य पूजा सामग्री से भी विधि-विधान के साथ पूजा की जा सकती है।

पूजा सामग्रीउपयोग
मिट्टी के दीपकदीपदान के लिए
सरसों का तेलदीपक जलाने के लिए
तिल का तेलअभ्यंग स्नान के लिए
फूल और मालाभगवान को अर्पित करने के लिए
धूप और अगरबत्तीपूजा के लिए
रोली और अक्षततिलक लगाने के लिए
फल और मिठाईभोग लगाने के लिए
गंगाजलपूजा स्थल की शुद्धि के लिए

नरक चतुर्दशी पर क्या करें और क्या नहीं?

नरक चतुर्दशी के दिन कुछ धार्मिक और पारंपरिक नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। इन परंपराओं का उद्देश्य घर में स्वच्छता, सकारात्मकता और धार्मिक वातावरण बनाए रखना है।

नरक चतुर्दशी पर क्या करें?

  • सुबह जल्दी उठकर अभ्यंग स्नान करें।
  • घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें।
  • भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण और पूजन करें।
  • यमराज के नाम से दीपदान करें।
  • घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं।
  • जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
  • परिवार के साथ प्रेम और सद्भाव बनाए रखें।

नरक चतुर्दशी पर क्या न करें?

  • घर में गंदगी और अनावश्यक अव्यवस्था न रखें।
  • किसी के साथ झगड़ा या अपशब्दों का प्रयोग न करें।
  • दूसरों को परेशान करने या किसी का अपमान करने से बचें।
  • पूजा-पाठ को केवल दिखावे का माध्यम न बनाएं।
  • दीपक जलाते समय लापरवाही न करें और आग से संबंधित सावधानियां रखें।

इन बातों को धार्मिक परंपराओं और अच्छे आचरण के रूप में अपनाया जा सकता है।

नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली में क्या अंतर है?

नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली को आमतौर पर एक ही पर्व के अलग-अलग नामों के रूप में जाना जाता है। हालांकि, छोटी दिवाली के अवसर पर दीपदान और काली चौदस की परंपराएं क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग समय पर निभाई जा सकती हैं।

साल 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह समाप्त होगी। इसलिए 7 नवंबर की शाम को चतुर्दशी तिथि के दौरान छोटी दिवाली और काली चौदस से जुड़ा दीपदान किया जा सकता है। वहीं, 8 नवंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि होने के कारण नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान किया जाएगा।

इस तरह दोनों दिनों की परंपराओं को समझकर पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करना आसान हो जाता है।

निष्कर्ष

नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली दीपावली पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह दिन हमें बुराई पर अच्छाई की जीत, स्वच्छता, सकारात्मकता और धार्मिक आस्था का संदेश देता है। इस दिन अभ्यंग स्नान, भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और यम दीपदान की परंपरा निभाई जाती है।

आप भी इस नरक चतुर्दशी पर अपने घर में दीपक जलाएं, भगवान का स्मरण करें और परिवार की सुख-शांति तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें। त्योहार का वास्तविक आनंद तभी है, जब हम अपने जीवन में भी प्रेम, सद्भाव और अच्छाई का प्रकाश फैलाएं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और पारंपरिक पूजा पद्धतियों पर आधारित है। पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग का अनुसरण करें।

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