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दिवाली 2026 पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की सजावट

दिवाली पूजा विधि 2026: लक्ष्मी-गणेश पूजा कैसे करें? जानें सामग्री, मंत्र और सही नियम

By Deepak Kumar
Published: शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 at 11:10 AM

दिवाली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं, रंगोली बनाई जाती है और परिवार के लोग मिलकर मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करते हैं। यह त्योहार रोशनी, खुशियों, नई शुरुआत और परिवार के साथ समय बिताने का संदेश देता है।

दिवाली 2026 में रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन बहुत से परिवार अपनी परंपराओं के अनुसार लक्ष्मी-गणेश की पूजा करके सुख-समृद्धि, बुद्धि और शांति की प्रार्थना करते हैं।

हालांकि, दिवाली की तैयारी केवल पूजा सामग्री जुटाने तक सीमित नहीं है। घर की साफ-सफाई, पूजा स्थल को व्यवस्थित करना, परिवार के साथ मिलकर पूजा करना और दूसरों की खुशियों का ध्यान रखना भी इस पर्व को खास बनाता है।

इस लेख में जानेंगे कि दिवाली 2026 पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा कैसे करें, किन सामग्रियों की जरूरत होती है, कौन-से मंत्र का जाप कर सकते हैं और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा क्यों की जाती है?

हिंदू धार्मिक परंपरा में मां लक्ष्मी को धन, समृद्धि और वैभव की देवी माना जाता है। वहीं भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभ कार्यों के आरंभ से जोड़ा जाता है। इसलिए दिवाली पर अनेक परिवार मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करते हैं।

इस पूजा का उद्देश्य केवल धन प्राप्ति की कामना करना नहीं है। इसके साथ परिवार में सुख-शांति, जीवन में विवेक, मेहनत करने की प्रेरणा और अपने साधनों का सही उपयोग करने की भावना भी जुड़ी होती है।

दिवाली को भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की परंपरा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि उनके स्वागत में लोगों ने दीप जलाए थे। इसी कारण दीपों का यह पर्व अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।

अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में दिवाली मनाने की परंपराएं कुछ भिन्न हो सकती हैं। इसलिए पूजा करते समय अपने परिवार की धार्मिक परंपरा का सम्मान करना अच्छा रहता है।

दिवाली 2026 की लक्ष्मी-गणेश पूजा कब करें?

दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। लक्ष्मी-गणेश पूजा सामान्यतः शाम के समय प्रदोष काल में की जाती है। हालांकि, पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त शहर, स्थानीय पंचांग और प्रचलित धार्मिक परंपरा के अनुसार जांचना चाहिए।

पूजा की तैयारी पहले से कर लें, ताकि शुभ समय में सामग्री खोजने या घर की सफाई करने की जल्दबाजी न करनी पड़े।

ध्यान रखें: इंटरनेट पर दिए गए किसी भी मुहूर्त को अपने शहर के लिए सही मानकर न अपनाएं। पूजा का समय प्रकाशित या इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

दिवाली पूजा सामग्री की पूरी सूची

लक्ष्मी-गणेश की पूजा के लिए बहुत अधिक या महंगी सामग्री खरीदना जरूरी नहीं है। अपनी जरूरत, बजट और पारिवारिक परंपरा के अनुसार सामग्री जुटाई जा सकती है।

festive lakshmi and ganesha puja altar (1)
Image Credit: Gemini

मुख्य पूजा सामग्री:

  • मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर
  • पूजा के लिए साफ चौकी और कपड़ा
  • दीपक और रूई की बत्तियां
  • पूजा के लिए तेल या घी
  • रोली, कुमकुम, अक्षत और हल्दी
  • फूल और फूलों की माला
  • धूप या अगरबत्ती
  • कलश और स्वच्छ जल
  • मौली या कलावा
  • फल, मिठाई और अन्य प्रसाद
  • पान-सुपारी, यदि आपकी परंपरा में इस्तेमाल होते हों
  • घंटी और आरती की थाली
  • सुरक्षित तरीके से दीप सजाने के लिए उपयुक्त स्थान

कुछ परिवार खील-बताशे, खील, मिठाई, कमल के फूल या अन्य पारंपरिक वस्तुएं भी पूजा में रखते हैं। हर सामग्री हर परिवार के लिए अनिवार्य नहीं होती। श्रद्धा, स्वच्छता और अपनी परंपरा के अनुसार व्यवस्था करें।

दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा कैसे करें? जानें पूरी विधि

घर और पूजा स्थल की सफाई करें

दिवाली से पहले घर की सफाई करें और पूजा स्थल को व्यवस्थित रखें। पूजा की चौकी को साफ कपड़े से सजाएं। मूर्तियों या तस्वीरों को साफ स्थान पर रखें और पूजा सामग्री को पास में व्यवस्थित कर लें।

घर की सफाई करते समय बिजली के तारों, दीपकों और ज्वलनशील वस्तुओं का भी ध्यान रखें।

पूजा की तैयारी पूरी करें

पूजा शुरू करने से पहले आवश्यक सामग्री एक जगह रख लें। एक थाली में रोली, अक्षत, फूल और दीपक जैसी जरूरी वस्तुएं व्यवस्थित कर सकते हैं।

पूजा स्थल पर पानी, प्रसाद और आरती की सामग्री भी तैयार रखें। इससे पूजा के समय बार-बार उठना नहीं पड़ेगा और परिवार के सभी सदस्य आराम से शामिल हो सकेंगे।

दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें

अपनी परंपरा के अनुसार पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान गणेश और मां लक्ष्मी का स्मरण करें।

दीपक को ऐसी जगह रखें जहां उसे आसानी से गिराया न जा सके। पर्दों, कागज, सजावटी कपड़ों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से उचित दूरी बनाए रखें।

भगवान गणेश का स्मरण करें

हिंदू परंपरा में शुभ कार्यों की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से की जाती है। सबसे पहले भगवान गणेश को प्रणाम करें और बुद्धि, विवेक तथा कार्यों में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देने की प्रार्थना करें।

इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार फूल, अक्षत और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।

मां लक्ष्मी की पूजा करें

अब मां लक्ष्मी का स्मरण करें। उन्हें फूल अर्पित करें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार रोली, अक्षत, धूप तथा दीप से पूजा करें।

इस अवसर पर परिवार की सुख-शांति, मेहनत से आजीविका कमाने की क्षमता, धन के सही उपयोग और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने की भावना के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।

पूजा करते समय मन को शांत रखें। यदि कोई मंत्र याद न हो, तो श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का नाम लेना भी आपकी पूजा का हिस्सा हो सकता है।

मंत्र जाप करें और भोग लगाएं

पूजा के दौरान अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र का जाप करें। इसके बाद फल, मिठाई या परिवार की परंपरा के अनुसार तैयार प्रसाद अर्पित करें।

भोग लगाने से पहले भोजन को स्वच्छ तरीके से तैयार करें और ढककर रखें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों तथा अन्य लोगों के साथ बांट सकते हैं।

आरती करें और पूजा पूर्ण करें

पूजा के अंत में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें। परिवार के सदस्य मिलकर आरती में शामिल हो सकते हैं।

इसके बाद सभी को प्रसाद दें और घर में दीपक सजाएं। पूजा के दौरान उपयोग की गई सामग्री को व्यवस्थित रखें तथा दीपकों की सुरक्षा पर ध्यान दें।

इस प्रकार अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार लक्ष्मी-गणेश की पूजा पूरी की जा सकती है।

दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश के कौन-से मंत्र का जाप करें?

पूजा के दौरान नीचे दिए गए सरल मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप कर सकते हैं।

भगवान गणेश का मंत्र:

ॐ गं गणपतये नमः॥

मां लक्ष्मी का मंत्र:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

इन मंत्रों का जाप अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार करें। किसी विशेष संख्या में जाप करना सभी परिवारों के लिए अनिवार्य नहीं है। यदि आपके घर में कोई पारंपरिक मंत्र या पूजा पद्धति प्रचलित है, तो उसका पालन कर सकते हैं।

दिवाली पर मां लक्ष्मी को क्या भोग लगाएं?

दिवाली की पूजा में भोग का विशेष स्थान है। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रसाद और भोग की परंपराएं अलग हो सकती हैं। आमतौर पर निम्नलिखित चीजें रखी जाती हैं:

  • मिठाई या घर में तैयार किया गया मीठा प्रसाद
  • फल
  • खील-बताशे
  • नारियल, यदि आपकी पारिवारिक परंपरा में शामिल हो
  • अन्य पारंपरिक पकवान

भोग के लिए साफ बर्तनों का उपयोग करें। प्रसाद को स्वच्छ स्थान पर रखें और पूजा के बाद परिवार के सदस्यों तथा जरूरतमंद लोगों के साथ बांटें।

यह याद रखें कि पूजा का महत्व केवल भोग की मात्रा या उसकी कीमत से नहीं जुड़ा है। श्रद्धा, स्वच्छता और दूसरों के साथ बांटने की भावना भी इस पर्व का अहम हिस्सा है।

दिवाली पर दीपक कहां और कैसे जलाएं?

दिवाली पर घर को दीपकों से सजाने की परंपरा है। दीपक घर के मुख्य द्वार, बालकनी, खिड़कियों या सुरक्षित खुले स्थानों पर रखे जा सकते हैं।

दीपक सजाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें:

  • दीपक को स्थिर और समतल स्थान पर रखें।
  • पर्दों, कपड़ों और कागज से दूर रखें।
  • बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें।
  • जलते दीपक को बिना निगरानी के न छोड़ें।
  • दीपक के पास बिजली के तार और ज्वलनशील सजावट न रखें।
  • घर के अंदर हवा और धुएं के उचित निकास का ध्यान रखें।

यदि मिट्टी के दीपक इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उन्हें ऐसी जगह रखें जहां तेल या घी गिरने से फिसलने या आग लगने का खतरा न हो।

दिवाली की रोशनी का आनंद लेते समय सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

दिवाली पूजा में किन बातों का ध्यान रखें?

पूजा करते समय कुछ सामान्य सावधानियां अपनाना उपयोगी रहता है।

स्वच्छता बनाए रखें: पूजा स्थल और सामग्री को साफ रखें। प्रसाद को ढककर रखें और साफ बर्तनों का इस्तेमाल करें।

दिखावे से बचें: पूजा के लिए अपनी क्षमता से अधिक खर्च करना जरूरी नहीं है। साधारण सामग्री के साथ भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।

परिवार की परंपरा का सम्मान करें: पूजा के क्रम, भोग और मंत्रों में परिवारों के बीच अंतर हो सकता है। दूसरों की परंपराओं को गलत कहने से बचें।

अंधविश्वास फैलाने से बचें: किसी विशेष वस्तु के न होने से अनिवार्य रूप से दुर्भाग्य आने जैसे दावों को निश्चित धार्मिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत न करें।

पटाखों में सावधानी रखें: बच्चों को पटाखे अकेले न चलाने दें। स्थानीय नियमों का पालन करें और संभव हो तो कम धुआं तथा कम शोर करने वाले उत्सव विकल्प अपनाएं।

बुजुर्गों और जरूरतमंदों का ध्यान रखें: तेज आवाज और धुएं से दूसरों को परेशानी हो सकती है। त्योहार मनाते समय आसपास के लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखें।

दिवाली पूजा का इन्फोग्राफिक: 7 आसान चरण

इस हिस्से को आप अपने लेख में एक अलग इन्फोग्राफिक के रूप में भी प्रस्तुत कर सकते हैं।

चरण 1 — सफाई: घर और पूजा स्थल को साफ करें।

चरण 2 — तैयारी: चौकी, मूर्तियां और पूजा सामग्री व्यवस्थित रखें।

चरण 3 — दीप प्रज्वलन: सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाएं।

चरण 4 — गणेश पूजन: भगवान गणेश का स्मरण करें।

चरण 5 — लक्ष्मी पूजन: मां लक्ष्मी को फूल और परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री अर्पित करें।

चरण 6 — मंत्र और भोग: मंत्र जाप करें और फल या मिठाई का भोग लगाएं।

चरण 7 — आरती और प्रसाद: आरती करें, प्रसाद बांटें और दीपकों की सुरक्षा का ध्यान रखें।

इन्फोग्राफिक के लिए सुझाव: 16:9 आकार में आकर्षक दिवाली थीम रखें। बीच में लक्ष्मी-गणेश की सुंदर पारंपरिक पूजा सजावट हो और चारों ओर सात चरण छोटे हिंदी वाक्यों के साथ दिखाए जाएं। अक्षर स्पष्ट हों और डिजाइन में बहुत अधिक टेक्स्ट न भरा जाए।

दिवाली पूजा का संक्षिप्त सार

विषयमुख्य जानकारी
दिवाली 2026रविवार, 8 नवंबर
मुख्य पूजामां लक्ष्मी और भगवान गणेश
पूजा का समयस्थानीय पंचांग के अनुसार
जरूरी तैयारीसफाई और पूजा सामग्री
प्रमुख मंत्रॐ गं गणपतये नमः॥
लक्ष्मी मंत्रॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
भोगफल, मिठाई और पारंपरिक प्रसाद
पूजा का समापनआरती और प्रसाद वितरण

दिवाली से जुड़ी विशेष मान्यताएं

दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा, घर में दीपक जलाना और साफ-सफाई करना कई परिवारों की पुरानी परंपराओं का हिस्सा है। इन रीति-रिवाजों के पीछे समृद्धि, स्वच्छता, प्रकाश और सकारात्मक शुरुआत की भावना जुड़ी होती है।

कई लोग इस दिन अपने व्यापार के खातों की पूजा करते हैं, नए कार्य की योजना बनाते हैं या परिवार के साथ बैठकर आने वाले समय के लिए लक्ष्य तय करते हैं। कुछ परिवार जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या अन्य आवश्यक वस्तुएं भी देते हैं।

इन परंपराओं को अपनाने का तरीका परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए दिवाली मनाते समय अपनी आस्था के साथ-साथ दूसरों की मान्यताओं और परिस्थितियों का भी सम्मान करें।

दिवाली का वास्तविक संदेश क्या है?

दिवाली हमें याद दिलाती है कि जीवन में रोशनी का अर्थ केवल घर को दीपकों से सजाना नहीं है। अपने व्यवहार में ईमानदारी लाना, रिश्तों में प्रेम बनाए रखना, गलतियों से सीखना और कठिन समय में उम्मीद बनाए रखना भी अपने जीवन को बेहतर बनाने के तरीके हैं।

मां लक्ष्मी की पूजा करते समय धन के साथ-साथ उसका सही उपयोग करने की भावना भी महत्वपूर्ण है। भगवान गणेश का स्मरण हमें विवेक से निर्णय लेने और कठिनाइयों का धैर्यपूर्वक सामना करने की प्रेरणा देता है।

यदि इस दिवाली हम अपने घर को साफ करने के साथ मन के पुराने मतभेद भी कम करने का प्रयास करें, परिवार के साथ समय बिताएं और किसी जरूरतमंद की सहायता करें, तो त्योहार का आनंद और भी बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

दिवाली 2026 पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार सरल तरीके से की जा सकती है। इसके लिए पूजा स्थल की सफाई करें, जरूरी सामग्री पहले से तैयार रखें, मंत्र जाप और आरती करें तथा परिवार के साथ प्रसाद बांटें।

पूजा के दौरान सटीक मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देखें और दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखें। महंगी सामग्री या बड़े आयोजन के बजाय स्वच्छता, श्रद्धा, आपसी प्रेम और जरूरतमंदों की सहायता को महत्व दें।

आप सभी को दिवाली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा से आपके परिवार में सुख, शांति, सद्भाव और खुशियां बनी रहें।

डिस्क्लेमर

यह लेख दिवाली से जुड़ी सामान्य हिंदू धार्मिक परंपराओं और प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। पूजा की विधि, मंत्र, भोग और शुभ मुहूर्त में क्षेत्र तथा परिवार की परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। सटीक पूजा समय के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य धार्मिक विद्वान से पुष्टि करें। धार्मिक मान्यताओं को निश्चित भविष्यवाणी या आर्थिक लाभ की गारंटी के रूप में न लें।

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